हैदराबाद | पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राजनीतिक गलियारों में उस समय हलचल तेज हो गई, जब असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम (AIMIM) ने हुमायूं कबीर की ‘आम जनता उन्नयन पार्टी’ (AJUP) से अपना गठबंधन खत्म करने का आधिकारिक ऐलान कर दिया। यह निर्णय हुमायूं कबीर के एक कथित विवादित वीडियो के सामने आने के बाद लिया गया है। ओवैसी की पार्टी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे ऐसे किसी भी व्यक्ति या दल के साथ खड़े नहीं हो सकते जो मुस्लिम समुदाय की ईमानदारी और सम्मान पर सवाल खड़े करता हो। इस टूट के बाद अब एआईएमआईएम ने बंगाल चुनाव में अकेले ही ताल ठोकने का फैसला किया है।
एआईएमआईएम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक कड़ा बयान जारी करते हुए पश्चिम बंगाल की वर्तमान और पिछली सरकारों पर जमकर निशाना साधा। पार्टी ने आरोप लगाया कि दशकों से सेक्युलर राजनीति का दावा करने वाली तृणमूल कांग्रेस और अन्य दलों के शासन के बावजूद बंगाल का मुसलमान आज भी सबसे गरीब, नजरअंदाज और दबा हुआ है। ओवैसी की पार्टी के अनुसार, हुमायूं कबीर के हालिया खुलासों ने मुस्लिम समुदाय की राजनीतिक कमजोरी को उजागर किया है। पार्टी का मानना है कि हाशिए पर पड़े समुदायों के उत्थान के लिए एक स्वतंत्र राजनीतिक आवाज का होना अनिवार्य है।
हुमायूं कबीर, जिन्हें पूर्व में विवादित प्रस्तावों के चलते तृणमूल कांग्रेस से निष्कासित किया गया था, अब अपनी नई पार्टी के साथ अलग-थलग पड़ते नजर आ रहे हैं। गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों के लिए दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को मतदान होना है, जिसके नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे। चुनावी तारीखों के बेहद करीब ओवैसी के इस कदम ने त्रिकोणीय मुकाबले की संभावनाओं को और रोचक बना दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एआईएमआईएम के अकेले लड़ने से कई सीटों पर समीकरण बदल सकते हैं, जिसका सीधा असर प्रमुख दलों के वोट बैंक पर पड़ेगा।

