प्रशासन बनाम विपक्ष: किसानों के मुद्दे पर सीहोर कलेक्ट्रेट में भारी हंगामा, जब साहब नहीं मिले तो कुत्ते को थमाया ज्ञापन

सीहोर। किसान मुद्दों को लेकर गुरुवार को जिला मुख्यालय पर कांग्रेस का प्रदर्शन उग्र तेवरों के साथ फूट पड़ा. कलेक्ट्रेट घेराव के दौरान मध्य प्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए कलेक्ट्रेट परिसर में ही धरना दे दिया. करीब ढाई घंटे तक कलेक्टर का इंतजार करने के बाद भी जब वे सामने नहीं आए, तो प्रदर्शनकारियों का गुस्सा चरम पर पहुंच गया और विरोध ने नाटकीय व तीखा रूप ले लिया.

आक्रोशित सिंघार ने विरोध का अनोखा लेकिन विवादित तरीका अपनाते हुए एक कुत्ते के गले में कलेक्टर लिखी तख्ती डाल दी और उसी को ज्ञापन सौंप दिया. इस घटनाक्रम से कलेक्ट्रेट परिसर में हड़कंप मच गया और सियासी माहौल गरमा गया. मौके पर मौजूद अधिकारियों पर भी सिंघार भड़कते नजर आए. उन्होंने तीखे शब्दों में कहा कि जब किसानों की समस्याएं सुनने का वक्त अफसरों के पास नहीं है, तो ऐसे पदों की उपयोगिता पर ही सवाल खड़े होते हैं.

इससे पूर्व जिला कांग्रेस कार्यालय पर सभा का आयोजन करते हुए कांग्रेस नेताओं ने प्रदेश सरकार को निशाने पर लिया. कार्यक्रम को नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार व अन्य कांग्रेस नेताओं ने संबोधित किया. इसके बाद जिला कांग्रेस अध्यक्ष राजीव गुजराती के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता और किसान कलेक्ट्रेट पहुंचेे. प्रदर्शन के दौरान जमकर नारेबाजी हुई और प्रशासन पर किसानों की अनदेखी के आरोप लगाए गए. कांग्रेस नेताओं ने कहा कि जिले में किसान लगातार संकट झेल रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी उनसे दूरी बनाए हुए हैं.

राजीव गुजराती ने कहा कि गेहूं खरीदी में हो रही देरी ने किसानों की स्थिति और बिगाड़ दी है. मंडियों में फसल लेकर पहुंचे किसान परेशान हैं, लेकिन खरीदी की रफ्तार बेहद धीमी है. दूसरी ओर बिजली विभाग और बैंक वसूली के लिए दबाव बना रहे हैं. एक तरफ फसल नहीं बिक रही, दूसरी तरफ बिल और कर्ज चुकाने का दबाव बढ़ता जा रहा है यह किसानों के साथ अन्याय है. कलेक्टर के इंतजार में धरने पर बैठे कांग्रेसियों के सब्र का बांध आखिरकार ढह गया और उन्होंने अपना विरोध जताने के लिए ऐसे घटनाक्रम को अंजाम दिया जिससे आगामी दिनों में सियासी माहौल गर्माया रह सकता है.

पूरे घटनाक्रम ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. कलेक्टर की अनुपस्थिति ने न केवल आक्रोश को भड़काया, बल्कि विरोध को और ज्यादा तीखा बना दिया. कांग्रेस ने साफ चेतावनी दी है कि यदि किसानों की समस्याओं का जल्द समाधान नहीं किया गया, तो आंदोलन को और उग्र रूप दिया जाएगा. इस अवसर पर नेता प्रतिपक्ष सिंघार के अलावा प्रदेश के पूर्व मंत्री राजकुमार पटेल, जिला कांग्रेस अध्यक्ष राजीव गुजराती, पूर्व जिलाध्यक्ष कैलाश परमार, किसान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष धर्मेन्द्र चौहान, पूर्व विधायक शैलेन्द्र पटेल, बृजेश पटेल, विवेक राठौर, आशीष गेहलोत, महिला कांग्रेस अध्यक्ष गुलाब बाई ठाकुर, राजाराम बड़े भाई, राजेन्द्र वर्मा, सुनील दुबे, तनिष त्यागी, ईश्वरसिंह चौहान आदि कार्यकर्ता मौजूद थे.

कांग्रेस ने किसान हित में रखी कई मांगें

कांग्रेस ने सरकार के सामने कई मांगें रखीं. इनमें तत्काल गेहूं खरीदी शुरू करना, न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीदी सुनिश्चित करना, किसानों को समय पर भुगतान देना और मंडियों में बिके गेहूं पर भावांतर योजना का लाभ देना शामिल है. साथ ही खरीदी केंद्रों पर पर्याप्त व्यवस्था करने और बिजली बिल में राहत देने की मांग भी उठाई गई. सहकारी ऋण वसूली का मुद्दा भी प्रदर्शन में प्रमुखता से उठा. कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि सरकार के कुप्रबंधन के कारण करीब 50 प्रतिशत किसान डिफॉल्टर हो चुके हैं. 31 मार्च की निर्धारित अंतिम तारीख के बावजूद किसानों को कोई राहत नहीं मिली, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति और खराब हो गई है. कांग्रेस ने मांग की कि वसूली की अंतिम तिथि बढ़ाई जाए और किसानों को राहत दी जाए.

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