
जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के उस महत्वपूर्ण आदेश को पूर्णत: वैध करार दिया, जिसके तहत 15 साल से अधिक पुरानी कमर्शियल बसों के संचालन पर रोक लगा दी गई थी। जस्टिस विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने बस ऑपरेटरों द्वारा दायर सभी 10 याचिकाओं को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि राज्य सरकार को परिवहन नीति बनाने और जनता के हित में निर्णय लेने का पूर्ण अधिकार है। कोर्ट ने कहा कि जब नियमों में संशोधन को पहले ही वैध ठहराया जा चुका है, तो उस आधार पर जारी प्रशासनिक आदेश को अवैध नहीं कहा जा सकता। यात्री सुरक्षा और पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए सरकार को स्टेज कैरिज परमिट से जुड़ी नीतियां बनाने का अधिकार है। न्यायालय ने गत 27 फरवरी 2026 को सुरक्षित रखा फैसला सुनाया।
मध्यप्रदेश सरकार ने 14 नवंबर 2025 को एक आदेश जारी किया था। जिसमें 15 साल की समय सीमा पूरी कर चुके व्यावसायिक वाहनों (विशेषकर बसों) को सडक़ों से हटाने का निर्देश दिया गया था। प्रदेश में वर्तमान में 899 ऐसी बसें चल रही हैं जो अपनी आयु सीमा पार कर चुकी हैं। बस संचालकों ने तर्क दिया था कि उनके पास वैध फिटनेस सर्टिफिकेट और परमिट मौजूद हैं। सभी याचिकाकर्ताओं के पास वैध स्टेट कैरिज परमिट हैं। परमिट का समय-समय पर नवीनीकरण भी कराया गया है। फिटनेस सर्टिफिकेट और टैक्स भी नियमित रूप से जमा किए गए हैं। 15 साल की सीमा नए परमिट पर लागू होनी चाहिए, पुराने पर नहीं। राज्य सरकार की ओर से न्यायालय को बताया गया कि 27 दिसंबर 2022 के संशोधन को पहले ही चुनौती दी जा चुकी है। 12 मार्च 2026 को डिवीजन बेंच ने इसकी वैधता को बरकरार रखा था। वर्तमान आदेश उसी संशोधन का परिणाम है, इसलिए इसे अलग से चुनौती नहीं दी जा सकती।
