
भोपाल। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने गुरुवार को समान नागरिक संहिता और गेहूं खरीदी में देरी को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की।
सिंघार ने कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि प्रस्तावित यूसीसी में दलित और आदिवासी समुदायों को शामिल किया जाएगा या नहीं, और क्या उनके अधिकारों, परंपराओं एवं रीति-रिवाजों की पर्याप्त सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी पहचान की अनदेखी करते हुए एक समान ढांचा थोपा गया, तो यह अन्याय होगा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी ऐसे किसी भी कदम का मजबूती से विरोध करेगी।
गेहूं खरीदी में देरी पर चिंता जताते हुए सिंघार ने आरोप लगाया कि इससे किसान गंभीर संकट में आ गए हैं। छोटे किसान, जिनके पास भंडारण की सुविधा नहीं है, लगभग एक महीने की देरी के कारण मजबूरन अपनी उपज औने-पौने दामों पर बेचने को विवश हुए।
उन्होंने दावा किया कि सरकारी नीतियों का लाभ किसानों तक पहुंचने के बजाय बिचौलियों और एजेंटों को मिल रहा है। उनके अनुसार प्रति क्विंटल 400 रुपये का लाभ दलालों की जेब में जा रहा है, जो कमीशनखोरी की ओर इशारा करता है। उन्होंने बड़े किसानों पर लगाए गए प्रतिबंधों की भी आलोचना करते हुए कहा कि इससे सरकार की कथनी और करनी में बड़ा अंतर उजागर होता है।
