सतना: शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता और सेवा अवधि गणना से जुड़े मुद्दों को लेकर शिक्षकों ने जबरदस्त प्रदर्शन किया। अध्यापक/शिक्षक संयुक्त मोर्चा मध्यप्रदेश के आह्वान पर सतना में जिला स्तरीय रैली आयोजित की गई, जिसमें हजारों शिक्षक शामिल हुए। उन्होंने ‘टीईटी रोलबैक’ के नारे लगाते हुए अपनी मांगों को जोरदार तरीके से उठाया।रैली के दौरान शिक्षा कर्मी, गुरुजी और संविदा शिक्षक एकजुट नजर आए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वर्षों से लंबित समस्याओं के समाधान के लिए अब निर्णायक संघर्ष किया जाएगा।
शिक्षकों ने एक स्वर में कहा, “न आप नेता, न मैं नेता, संघर्ष ही हमारा नेता है,” और इसी संकल्प के साथ आंदोलन को आगे बढ़ाने की बात कही। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता समाप्त करना और नवीन शिक्षक संवर्ग में प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा अवधि की गणना लागू करना शामिल है। शिक्षकों का कहना है कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) के प्रावधानों एवं माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के अनुसार कई वर्गों को टीईटी से छूट प्राप्त है, इसके बावजूद विभाग द्वारा इसे अनिवार्य किया जाना न्यायसंगत नहीं है। कार्यक्रम के अंत में सभी शिक्षकों ने एकजुटता का परिचय देते हुए संकल्प लिया कि जब तक उनकी जायज मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन निरंतर जारी रहेगा।
प्रथम नियुक्ति तिथि से हो गणना
शासकीय शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष अतुल सिंह ने आरोप लगाया कि सेवा अवधि की गणना प्रथम नियुक्ति तिथि से न किए जाने के कारण उन्हें पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य वैधानिक लाभों से वंचित रहना पड़ रहा है, जिससे उनमें असंतोष और मानसिक तनाव बढ़ रहा है। प्रदर्शन के बाद शिक्षकों ने सतना कलेक्ट्रेट पहुंचकर मुख्यमंत्री के नाम संबोधित एक ज्ञापन एसडीएम को सौंपा। राज्य अध्यापक शिक्षक संघ के प्रांतीय उपाध्यक्ष शैलेन्द्र त्रिपाठी ने घोषणा की है कि आगामी 18 अप्रैल को भोपाल में “शंखनाद रैली” आयोजित की जाएगी, जिसमें प्रदेशभर के शिक्षक बड़ी संख्या में शामिल होंगे।
