जादू-टोने की शंका में पिता-बेटी की हत्या, हाईकोर्ट ने बरकरार रखी सजा

जबलपुर। जादू-टोने की शंका पर पिता-बेटी की हत्या करने वाले आरोपी की अपील को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट जस्टिस विवेक अग्रवाल तथा जस्टिस आर एस बिसेन की युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि गवाहो व मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर ट्रायल कोर्ट ने सजा से दंडित करने में कोई गलती नहीं की है।

बालाघाट जिला न्यायालय के द्वारा पिता-बेटी की हत्या करने के आरोप में आजीवन कारावास की सजा से दंडित किये जाने के खिलाफ आरोपी बृजलाल परते की तरफ से हाईकोर्ट में अपील दायर की गयी थी। अपील में कहा गया था कि प्रकरण में मृतकों के रिश्तेदारों को गवाह बनाया गया था। उसके खिलाफ घटना का कोई चश्मदीद गवाह नहीं है।

शासकीय अधिवक्ता की तरफ से युगलपीठ को बताया गया कि आरोपी बृजलाल परते की पत्नी बीमार रहती थी। उसे शंका थी कि गांव में रहने वाले मंशा राम ने उसकी पत्नी पर जादू-टोना किया है। आरोपी इसी कारण से मंशा राम से दुश्मनी रखता था। आरोपी 25 जून 2014 की सुबह कुल्हाड़ी लेकर मंशा राम के घर गया था। आरोपी ने घर में घुसने के बाद कुल्हाड़ी से हमला कर मंशा राम तथा उसकी बेटी कांति बाई की हत्या कर दी।

एकलपीठ ने दस्तावेजों के अवलोकन करने के बाद पाया कि ट्रायल कोर्ट ने पेश किए गए सबूतों, गवाहों के बयान और मेडिकल रिपोर्ट पर गौर करने के बाद पाया है कि आरोपी ने दोहरे हत्याकांड को अंजाम दिया है। युगलपीठ ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही करार देते हुए सजा को बरकरार रखते हुए अपील को खारिज कर दिया।

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