मध्य क्षेत्र की डायरी दिलीप झा।अजब गजब मध्यप्रदेश मेरा आदमी तेरा आदमी के पक्षपात रवैये से उबर नहीं पा रहा है। हर क्षेत्र में पक्षपात से प्रदेश कै लोग और युवाओं में आक्रोश है। स्कूल कॉलेजों से जो सूचनाएं आ रही वह हैरान करने वाली हैं। इन दिनों एनएसयूआई और एबीवीपी के नेतृत्व में लगातार धरना प्रदर्शन कर रहे हैं लेकिन शिक्षा विभाग की नींद नहीं खुली रही है। इस बात से इंकार नहीं कर सकते कि प्रदेश के नित्य समस्याओं से जूझ रहे हैं। प्रदेश में सभी खेल क्षेत्रों में बुरा हाल है। खिलाड़ियों को उचित सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। खिलाड़ियों के चयन में धांधली हो रही है। खिलाड़ियों के अभिभावक निराश हैं। प्रदेश की होनहार और प्रदेश की पहली महिला घुडसवार सुदीप्ति जो राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय घुडसवार खिलाड़ी है एवं 2023 के ऐशियन गेम्स की ऐतिहासिक स्वर्ण पदक विजेता टीम की सदस्य है, वे 2026 में जापान में होने वाले ऐशियन गेम्स के लिये यूरोप में लगातार 3 वर्षों से घुडसवारी का प्रशिक्षण प्राप्त कर रही है. भारतीय घुडसवारी महासंघ द्वारा जारी चयन नियम के अनुसार अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में ट्रायल खेलकर आवश्यक क्वालिफिकेशन प्राप्त किये और अंतर्राष्ट्रीय घुड़सवारी महासंघ द्वारा आयोजित इन क्यालिफाईंग ट्रायल्स के मार्क भारतीय घुड़सवारी महासंघ के नियमानुसार प्रेषित किये ।
भारतीय घुड़सवारी महासंघ ने प्रकाशित चयन नियम 17 अप्रैल 2020 के क्लाउज 8 ( एफ ) और 13(जी) को नजरअंदाज करते हुऐ गोपनीय तरीके से रैंकिंग फर्फाम्युला तैयार कर सुदिप्ती को रिजर्व 2 कैटेगरी में ननप्लेइंग एथलीट में डाल दिया है।
जबकि चयन प्रक्रिया और एशियन गेम्स 2020 के फॉर्मेट के अनुसार एशियन गेम्स में घुड़सवारी के दो प्रभाग अलग-अलग होते है। पहला टीम गेम और दूसरा व्यक्तिगत गेम। सुदिप्ती ने टीम गेम के लिये चयन प्रक्रिया अनुसार एशियन गेम्स की निर्धारित योग्यता एवं एमईआर ( मिनिमम एलिजीबीलिटी रिक्वायरमेंट ) अंक प्राप्त किये है और उक्तानुसार सुदिप्ती दूसरे क्रम पर वरीयता सूची में आती है। चयन प्रक्रिया के अनुसार व्यक्तिगत क्वालिफाइंग अंक प्राप्त घुडसवारों को वरीयता देने के बाद भी सुदिप्ती ने टीम में चौथे स्थान पर अंक तालिका में अपनी जगह बनाई है परंतु भारतीय घुड़सवारी महासंघ ने प्रकाशित चयन प्रक्रिया के नियमों से परे जाकर छठे स्थान वाले घुड़सवार जिसके पास व्यक्तिगत अंक नहीं है और चयन प्रक्रिया के अनुसार सुदिप्ती से टीम गेम में बैस्ट 2 एमईआर अंकों से कम होने के बाद भी चौथे स्थान पर गोपनीय तरीके से नया फार्मूला बनाकर वरीयता सूची में बदलाव कर सुदिप्ती को सूची में छठे स्थान रिजर्व 2 पर कर दिया है।
संपूर्ण अर्हताऐं होने के बाद भी भारतीय घुडसवारी महासंघ ने मेरिट सूची बदलकर नये अघोषित एवं अप्रकाशित गणना सूत्र जो कही भी उल्लेखित नहीं है उत्तके अनुसार छठे स्थान के खिलाड़ी को चौथे स्थान पर लेकर सुदिप्ती के साथ भेदभाव पूर्ण रवैया अपनाया है। चयन प्रक्रिया अनुसार सूची गणना का चार्ट नीचे दर्शाया गया है जिसमें स्पष्ट है कि प्राप्त एमईआर अनुसार सुदिप्ती टीम सूची में दूसरे स्थान पर एवं व्यक्तिगत एम ईआर प्राप्त खिलाड़ियों को उनकी वरीयता सूची में रखने के बाद भी सुदिप्ती चौथे स्थान पर है।
सुदिप्ती ने इस संबंध में एडहॉक कमिटी की अध्यक्ष यशोधरा राजे सिंधिया,इंडियन ओलम्पिक एसोसिएशन और भारत खेल मंत्रालय से अपील की है कि प्रकाशित चयन प्रक्रिया अनुसार ही वरीयता सूची बनाई जाये और अप्रकाशित एवं अघोषित नये चयन प्रक्रिया के अनुसार गणना नहीं की जायें। क्योंकि भारत का प्रतिनिधित्व करना हर खिलाड़ी का एक सपना होता है जिसके लिये वर्षों की तपस्या, मेहनत और प्रशिक्षण अपने घर परिवार को त्याग कर एक समर्पित जीवन जीना होता है उसके बाद यदि अर्हताएँ (क्यालिफिकेशन) प्राप्त करने के बाद भेदभाव के चलते निर्धारित मापदंड होने के बाद भी अंतिम सूची में जगह ना मिलना अत्यधिक मायूस कर रहा है।
इसलिए मध्यप्रदेश के खेल मंत्रालय, भारत सरकार के खेल मंत्रालय, इंडियन ऑलम्पिक ऐसोसिऐशन सभी को ये सोचना चाहिए कि भारतीय घुडसवारी महासंध को प्रकाशित चयन प्रक्रिया में दिये गये मैरिट चयन के नियमानुसार ही भारतीय टीम में निर्धारित मापदंडों की रैंकिंग के अनुसार ही चयन हो लेकिन विडंबना है कि ऐसा होता नहीं है।
