सोने जैसी फसल पर फिर गया पानी: ओलावृष्टि से 40 प्रतिशत तक नुकसान, मुआवजे की आस में किसान

अशोकनगर: पिछले दिन जिले के करीब एक दर्जन गांवों में ओलावृष्टि हुई। इस ओलावृष्टि से बहादुरपुर तहसील एवं अशोकनगर तहसील का कचनार-राजपुर क्षेत्र सर्वाधिक प्रभावित हुआ है। ओलावृष्टि से पहले देर शाम को बादल गहरा गए थे। काफी देर तक बादल गरजे, बिजली कौंधती रही, इसके बाद तेज बौछारों के साथ पानी बरसने लगा। पानी के साथ ओले गिरे तो कई गांवों के किसान रो पड़े। जसैया निवासी राजभान सिंह यादव ने बताया कि गेंहू की फसल पूरी तरह से पककर तैयार है। हार्वेस्टर न मिलने के कारण काटने में देरी हो रही थी, इसी बीच ओलावृष्टि हो गई। इससे कहीं कहीं तो 40 प्रतिशत तक नुकसान हो गया।

गेंहू को बाली टूटकर जमीन पर आ गिरी, तेज हवाओं के चलने से फसल आड़ी होकर खेतों में बिछ गई। सुबह एसडीएम मुंगावली इसरार खान, राजस्व निरीक्षक रामकृष्ण दमदमा-मोलाडैम में बिछ गई सफेद चादरः बहादुरपुर तहसील क्षेत्र के दमदमा और मौलाडम गांवों में ओलावृष्टि से सफेद सी चादर जमीन पर बिछ गई। दमदमा के किसान संतीस गुर्जर ने बताया कि अधिकांश फसलें काटी जा चुकी हैं लेकिन जिन फसलों की बोवनी देरी से हुई थी, उन खेतों में अभी भी गेंहू खड़ा है। ओलों के बरसने से इन खेतों में हो सर्वाधिक नुकसान हुआ है। बताया गया है इस क्षेत्र के टीटौर, जसैया, बांसखेड़ी, फुटेरा, जमुनिया, दमदमा, मोलाडैम, गोरा, गद्ली, कुम्हर्रा, खोपरा, सोपरा, बरी गांवों में ओलावृष्टि हुई है। वहीं राजपुर-कचनार क्षेत्र के बामीरा गांव में भी ओलावृष्टि के समाचार हैं।अहिरवार, हल्का पटवारी सुरेष बैरागी जसैया गांव में पहुंचे थे। जहां उन्होंने खेतों में पहुंचकर नुकसान का जायजा लिया।
खेतों में बिछ गई सोने जैसी फसलः
बरी के किसान जगनाथ ओझा ने बताया कि फसल कटाई के लिए शहर में ठंडक, पर दो दिन अभी और भारीः जिला मुख्यालय पर भी देर रात तक रुक-रुक कर मध्यम बारिश होतीरही, जिससे तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। रविवार सुबह हालांकि धूप खिलने से थोड़ी राहत मिली, लेकिन मौसम विभाग की चेतावनी ने धुकधुकी बढ़ा दी है। मौसम विभाग ने पूर्वानुमान जताया है कि अगले 48 घंटों तक जिले में बादल छाए रहने और गरज-चमक के साथ हल्की बारिश की संभावना है। रविवार को दिन का अधिकतम तापमान 38 डिग्री और न्यूनतम तापमान 19 डिग्री रहा।
पूरी तरह तैयार थी, लेकिन इस बेमौसम मार ने उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया।

ओलावृष्टि से फसलों के दाने झड़ गए हैं और गुणवत्ता भी प्रभावित हुई है,जिससे क्षेत्र के किसानों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। बेर के आकार के गिरे ओलों ने खेतों में खड़ी और कटकर रखी हुई फसलों कोजमीन पर बिछा दिया है।प्रशासन से मुआवजे की आसः
फसलों की बर्बादी देख किसान अब सरकार और प्रशासन की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं। प्रभावित गांवों के किसानों ने मांग की है कि जल्द से जल्द सर्वे कराकर उचित मुआवजे की राशि प्रदान की जाए, ताकि उन्हें इस संकट की घड़ी में कुछ सहारा मिल सके। दूसरी ओर प्रशासन की ओर से पटवारियों ने भी रविवार सुबह ही कई गांवों में पहुंचकर नुकसान का प्रारंभिक आंकलन किया है।
इनका कहना है
हमने आज ओलावृष्टि से प्रभावित सभी गांवों में नुकसान का प्रारंभिक आंकलन किया है। जिसमें 6-7 गांवों में गेंहू की फसल आशिक तौर पर प्रभावित हुई है। एक-दो दिन में पटवारियों द्वारा रिपोर्ट मिलने के बाद आगामी तैयारी की जाएगी।
अंजनि कुमार चौधरी, प्रभारी तहसीलदार, बहादुरपुर

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