मध्य क्षेत्र की डायरी
दिलीप झा: मध्यप्रदेश में आए दिन हत्या , चाकूबाजी और साइबर ठगी जैसी घटनाओं में लगातार वृद्धि की वजह लोगों ने यह कहना शुरू कर दिया है कि सरकार के साथ से कानून व्यवस्था फिसलती जा रही है।जबकि कानून राज को बनाए रखना शासन प्रशासन की जिम्मेदारी है। 30 मार्च को दिनदहाड़े भोपाल में एक चाय दूकान के मालिक की चाकू मारकर हत्या ,रायसेन में सरपंच पति की गोली मारकर और उसी दिन छतरपुर में कुल्हाड़ी से काटकर युवक की हत्या इस बात को तस्दीक करती हमारा सिस्टम लुंजपुंज हो गया है और अपराधियों के हौसले बुलंद हैं।
अगर राजधानी में सरेआम किसी दूकान मालिक की बदमाश गोली मारकर हत्या कर दे तो सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े होंगे कि आखिर पुलिस का इकबाल खत्म हो गया क्या?
समाज में पुलिस का खौफ होना निहायत जरूरी है। यह सर्वविदित है कि अपराधियों के मंसूबे को चकनाचूर किये बिना अपराध को नियंत्रित करना दूर की कौड़ी है। सूत्र बताते हैं कि जब जब हमारी पुलिस अपराधियों पर अंकुश लगाने की कोशिश करती है तो उन्हें राजनैतिक हल्कों से दबावों का सामना करना पड़ता है। इसमें कितनी सच्चाई है, भगवान जाने लेकिन इसमें कोई दो राय नहीं कि अगर पुलिस प्रशासन चलाने का यही तौर तरीका रहा तो फिर अपराधियों के हौसले बुलंद ही रहेंगे। ऐसा प्रतीत होता है कि अपराधियों में पुलिस का खौफ खत्म हो गया है। सूत्र बताते हैं कि बदमाशों को भली-भांति पता है कि वे कुछ भी कर देंगे उनपर कोई बड़ी कार्रवाई हो ही नहीं सकती। जाहिर है, जब इस तरह की पुलिसिंग नीति चलेगी तो बेहतर सुरक्षा व्यवस्था की उम्मीद लोग कैसे कर सकते हैं।
भोपाल के अशोका गार्डन थाना क्षेत्र में बदमाश आसिफ बम ने अपने दो अन्य साथियों के साथ चाय दूकान चलाने वाले विजय मेवाड़ा की हत्या कर दहशत फैला दी और वह फरार हो गया। हिंदू संगठनों के नेताओं ने थाने का घेराव किया तो पुलिस हरकत में आई और दो आरोपियों को कुछ घंटे बाद ही दबोच लिया लेकिन मुख्य आरोपी को पुलिस ने तीन दिन बात रातीबड़ से शॉर्ट एनकाउंटर करके गिरफ्तार किया है। आरोपी आसिफ बम ने पुलिस को दिए बयान में कहा है कि चाय वाले को उसने नशे में चाकू मार दिया। सबसे बड़ा सवाल उठता है कि मृतक विजय का परिवार इसके लिए किसे दोषी ठहराए सरकार, लुंजपुंज पुलिस सिस्टम जो हमारी सुरक्षा के लिए बनाया गया है।
दतिया में भाजपा पार्षद की गोली मारकर हत्या
30 मार्च को ही दतिया शहर में भारतीय जनता पार्टी के पार्षद कल्लू कुशवाहा की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी। घटना के बाद से पूरे इलाके में दहशत और आक्रोश का माहौल उत्पन्न हो गया.
यह घटना उस समय हुई जब वे मंदिर से लौट रहे थे. सेवड़ा चुंगी के पास, 5-6 बदमाशों के एक समूह ने जो घात लगाकर बैठे थे उन्हें घेर लिया और अंधाधुंध गोलियां चलाईं, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई.
चश्मदीदों और स्थानीय निवासियों का आरोप है कि अपराध स्थल के बेहद करीब पुलिस चौकी होने के बावजूद, पुलिस बल आधे घंटे की देरी से मौके पर पहुंचा. इस दौरान पार्षद का शव सड़क पर ही पड़ा रहा, जिससे लोगों का गुस्सा भड़क उठा.
पार्षद कल्लू कुशवाहा ने अपनी चोटों के कारण दम तोड़ दिया। घटना एक भीड़भाड़ वाले इलाके में हुई, जिसने सुरक्षा व्यवस्था की स्थिति को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कहने का आशय यह है कि पुलिस मुस्तैद नहीं है। आखिर हमारी पुलिस व्यवस्था कब सुचारू होगी यह शहर के प्रबुद्ध लोग सरकार से पूछ रहे हैं।
