भोपाल। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए शराब दुकानों के ई-टेंडर आवंटन से राज्य सरकार को राजस्व में बड़ी बढ़ोतरी के संकेत मिले हैं। जहां एक ओर शुरुआती दौर में जोरदार प्रतिस्पर्धा के चलते आय में उछाल आया है, वहीं बाद के राउंड में गिरावट और कई दुकानों पर कम बोली ने नई रणनीति की जरूरत भी सामने रख दी है।
राज्य में 3 अप्रैल तक ई-टेंडर प्रक्रिया के जरिए कुल 1,396 समूहों का सफल निस्तारण किया जा चुका है। इस प्रक्रिया में 16,434.94 करोड़ रुपये के आरक्षित मूल्य के मुकाबले 16,637.85 करोड़ रुपये का राजस्व सुनिश्चित हुआ है, जो न केवल आरपी से 1.23% अधिक है, बल्कि पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 की तुलना में 34.13% की उल्लेखनीय वृद्धि भी दर्शाता है।
ई-टेंडर के शुरुआती चरणों में खासा उत्साह देखने को मिला। पहले बैच में 9.5%, दूसरे में 11.3% और तीसरे में 11.6% तक अधिक राजस्व प्राप्त हुआ। इसके बाद चौथे और पांचवें राउंड में भी क्रमशः 6.5% और 0.8% की वृद्धि दर्ज की गई। हालांकि बाद के चरणों में स्थिति बदलती नजर आई और नौवें, दसवें तथा बारहवें राउंड में क्रमशः -17.4%, -13% और -21.5% की गिरावट सामने आई, जो बाजार की बदलती मांग और प्रतिस्पर्धा को दर्शाती है।
पूरे राज्य में कुल 19,952.89 करोड़ रुपये मूल्य के समूहों में से अब तक 16,627.41 करोड़ रुपये यानी 83.39% का निस्तारण हो चुका है। शेष 3,517.95 करोड़ रुपये मूल्य के समूहों से 4,222.68 करोड़ रुपये राजस्व मिलने की संभावना जताई जा रही है।
ऑफरों के वर्गीकरण में भी मिश्रित रुझान सामने आए हैं। -20% तक की श्रेणी में 28 दुकानों पर अपेक्षा से अधिक 2,17,42,89,340 रुपये के ऑफर प्राप्त हुए, जबकि -30% तक की श्रेणी में 193 दुकानों के लिए आरपी 15,49,26,82,691 रुपये के मुकाबले 12,16,34,34,272 रुपये के ऑफर मिले। वहीं -30% से -40% श्रेणी में 106 दुकानों पर 5,50,55,15,851 रुपये, -40% से -50% में 132 दुकानों पर 5,51,75,79,234 रुपये और -50% से कम श्रेणी में 215 दुकानों पर 5,77,19,43,768 रुपये के ऑफर प्राप्त हुए। एक दुकान पर कोई बोली नहीं लगी।
कुल मिलाकर 454 दुकानों के लिए 35,28,18,52,371 रुपये के आरक्षित मूल्य के मुकाबले 16,79,50,38,853 रुपये के ऑफर प्राप्त हुए, जो यह संकेत देता है कि कई स्थानों पर अपेक्षा से कम बोली लगी है।
इधर, नीलामी के बाद शेष बची 489 दुकानों को लेकर आबकारी विभाग की मंत्री-मंडलीय समिति की वर्चुअल बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। तय किया गया कि इन दुकानों के संचालन के लिए विभाग स्वयं एक निगम या मंडल गठित करने की संभावना पर विचार करेगा।
इस पूरी प्रक्रिया से साफ है कि जहां ई-टेंडरिंग से सरकार को बेहतर राजस्व मिलने की उम्मीद मजबूत हुई है, वहीं कुछ राउंड में गिरावट और कम बोली भविष्य की नीतियों और रणनीति के लिए अहम संकेत भी दे रही है।
