
सलामतपुर। विश्व प्रसिद्ध बौद्ध स्तूपों के लिए विख्यात सांची नगर इन दिनों पुरातत्व विभाग की ‘विकास विरोधी’ नीतियों के कारण सुर्खियों में है। सालों से केंद्र और राज्य सरकार की जनहितकारी योजनाओं की राह में रोड़ा बन रहे भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के खिलाफ अब सांची की जनता का आक्रोश दिल्ली की चौखट तक पहुंच गया है।
नगर परिषद अध्यक्ष के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने दिल्ली पहुंचकर केंद्रीय मंत्रियों से गुहार लगाई है, जिसके बाद अब वर्षों पुरानी इस समस्या के सुलझने की उम्मीद जागी है।
दो तिहाई शहर में निर्माण पर ‘अघोषित’ पाबंदी
सांची नगर की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि इसका लगभग दो-तिहाई हिस्सा पुरातत्व विभाग की निषिद्ध (Prohibited) और प्रतिबंधित (Regulated) सीमाओं के दायरे में आता है। स्थानीय अधिकारियों द्वारा इन नियमों का हवाला देकर लगभग पूरे शहर में किसी भी नए निर्माण या मरम्मत कार्य पर रोक लगा दी गई है। इसका सबसे बुरा असर उन गरीब परिवारों पर पड़ा है, जो प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत अपने सिर पर पक्की छत का सपना देख रहे थे। पात्र होने के बावजूद, विभाग की एनओसी (NOC) न मिलने के कारण सैकड़ों आवास अधूरे पड़े हैं या शुरू ही नहीं हो पा रहे हैं।
दिल्ली में गूंजी सांची की आवाज–
जब स्थानीय स्तर पर कोई हल नहीं निकला, तो नगर परिषद अध्यक्ष पप्पू रेवाराम के नेतृत्व में पार्षदों का एक दल दिल्ली रवाना हुआ। प्रतिनिधिमंडल ने क्षेत्रीय सांसद और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को वस्तुस्थिति से अवगत कराया। सांची की इस गंभीर समस्या को देखते हुए शिवराज सिंह चौहान स्वयं प्रतिनिधिमंडल को लेकर केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत के पास पहुंचे।
6 से 8 महीने में होगा समाधान
मुलाकात के दौरान गजेन्द्र सिंह शेखावत ने सांची की जनता की परेशानियों को बेहद गंभीरता से सुना। उन्होंने माना कि विकास और विरासत के बीच संतुलन जरूरी है और नियमों की आड़ में आम जनता के बुनियादी हक नहीं छीने जा सकते। मंत्री ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि आने वाले 6 से 8 महीनों के भीतर सांची की इस समस्या का स्थाई तकनीकी और कानूनी समाधान निकाल लिया जाएगा।
इस आश्वासन के बाद नगरवासियों में हर्ष की लहर है। प्रतिनिधिमंडल में पार्षद प्रतिनिधि रघुवीर सिंह चौहान, राजू वर्मा, हितेश पाल सहित नगर परिषद के अधिकारी महीपत शर्मा और हिमाचल सिंह ठाकुर भी शामिल रहे।
सांची जैसे ऐतिहासिक महत्व वाले शहरों में पुरातत्व विभाग के नियम अक्सर आम लोगों के लिए सिरदर्द बन जाते हैं। यदि केंद्र सरकार इस मामले में हस्तक्षेप कर नियमों में ढील देती है, तो न केवल सांची का बुनियादी ढांचा सुधरेगा, बल्कि हजारों परिवारों को अपना घर मिल सकेगा।
