नीलगंगा सरोवर का होगा जीर्णोद्धार, 4.5 करोड़ से प्रोजेक्ट तैयार

उज्जैन: सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के बीच शहर के अतिप्राचीन और पौराणिक महत्व वाले नीलगंगा सरोवर का व्यापक जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण किया जाएगा. लगभग 4.5 करोड़ रुपये की लागत से इस पवित्र स्थल का कायाकल्प कर इसे एक प्रमुख तीर्थ और रमणीय पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना बनाई गई है.नगर निगम द्वारा तैयार की गई डीपीआर को शासन से स्वीकृति मिल चुकी है और इसके टेंडर भी हो चुके हैं. जल्द ही निर्माण कार्य प्रारंभ होगा.

जूना अखाड़ा स्थापित है यहां
नीलगंगा सरोवर उज्जैन की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है. यहां जूना अखाड़ा स्थापित है और देशभर से संत-महंत, महामंडलेश्वर तथा साधु-संत यहां आते हैं. सिंहस्थ के दौरान अखाड़ों की पेशवाई भी इसी पावन स्थल से निकलती है, इसलिए यह क्षेत्र संत परंपरा और सनातन आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है.

पूजन, अर्चन, स्नान के लिए घाट
सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखते हुए यहां घाटों का निर्माण, सरोवर की साफ-सफाई, परिसर का सौंदर्यीकरण तथा अन्य आधारभूत सुविधाओं का विकास किया जाएगा. श्रद्धालुओं और संतों के स्नान तथा पूजा-अर्चना की सुविधा के लिए नए घाट बनाए जाएंगे. वर्तमान में यहां गंगा प्रतिमा भी स्थापित है और अखाड़ा परिषद द्वारा इस क्षेत्र को संरक्षित करते हुए यहां कार्यालय बनाने का निर्णय लिया गया है.

अतिक्रमण अवैध निर्माण हटेंगे
नीलगंगा क्षेत्र के आसपास के मार्गों का भी विस्तार किया जा रहा है, ताकि सिंहस्थ के दौरान आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को आवागमन में सुविधा मिल सके. जिला प्रशासन ने क्षेत्र में हुए अवैध निर्माण और अतिक्रमण को हटाने के भी निर्देश दिए हैं, जिससे सरोवर का प्राकृतिक स्वरूप और पवित्रता बनाए रखी जा सके.

यहां माता गंगा आई
धार्मिक मान्यता है कि प्राचीन काल में स्वयं माता गंगा इस स्थान पर प्रकट हुई थीं, तभी से इस क्षेत्र का नाम नीलगंगा पड़ा. साधु-संतों के प्रयासों से वर्तमान में सरोवर में पर्याप्त पानी उपलब्ध है और श्राद्ध पक्ष के दौरान यहां पिंडदान और तर्पण का भी प्रमुख केंद्र बन गया है.

बड़ का पेड़ लगाया
जूना अखाड़ा के प्रमुख हरि गिरि महाराज इन दिनों उज्जैन में ही हैं. उनके सान्निध्य में सोमवार को नीलगंगा सरोवर परिसर में एक बरगद का पौधा भी लगाया गया है. मान्यता है कि यह पौधा आने वाले समय में विशाल वृक्ष बनकर संतों और श्रद्धालुओं को छाया प्रदान करेगा और इस पावन भूमि की आध्यात्मिक गरिमा को और बढ़ाएगा.

सीएम करेंगे भूमि पूजन
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी गंगा दशहरा के अवसर पर नीलगंगा सरोवर पहुंच चुके हैं और जल्द ही इस महत्वपूर्ण परियोजना का भूमि पूजन भी करने वाले हैं. सिंहस्थ मेला अधिकारी आशीष सिंह ने भी स्थल का निरीक्षण कर डीपीआर का अवलोकन किया है तथा निर्माण कार्य को गुणवत्तापूर्ण और स्थायी रूप से पूरा करने के निर्देश दिए हैं.

आस्था और पर्यटन का नया केंद्र
क्षिप्रा नदी के किनारे लगभग 29 किलोमीटर लंबे घाटों के निर्माण के साथ-साथ नीलगंगा सरोवर का यह अलग प्रोजेक्ट उज्जैन की धार्मिक पहचान को और मजबूत करेगा. आने वाले समय में यह स्थल संत परंपरा, श्रद्धालुओं की आस्था और प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत संगम बनकर उभरेगा. आस्था और पर्यटन का यह नया केंद्र बनेगा

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