संकट के समय समन्वय के साथ काम करना जरूरी

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि वैश्विक संकट अब सीमाओं में बंधे नहीं रहते, बल्कि उनका प्रभाव सीधे आम नागरिक के जीवन तक पहुंचता है. हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राज्यों के मुख्यमंत्रियों और केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपालों के साथ की गई वर्चुअल बैठक इसी बदलते वैश्विक परिदृश्य की गंभीरता को दर्शाती है. यह बैठक केवल एक प्रशासनिक औपचारिकता नहीं थी, बल्कि एक व्यापक रणनीतिक दृष्टिकोण का संकेत भी थी, जिसमें ‘टीम इंडिया’ की अवधारणा केंद्र में है.

प्रधानमंत्री का ‘टीम इंडिया’ का आह्वान वस्तुत: सहकारी संघवाद की उस भावना को पुनर्स्थापित करता है, जिसने कोविड-19 जैसे अभूतपूर्व संकट में देश को संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. इस समय जब खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता के कारण ऊर्जा आपूर्ति और व्यापारिक मार्ग प्रभावित हो रहे हैं, तब केंद्र और राज्यों के बीच सशक्त समन्वय ही सबसे बड़ा सुरक्षा कवच बन सकता है. यह समझना आवश्यक है कि संकट के समय राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर एक साझा राष्ट्रीय दृष्टिकोण अपनाना ही देशहित में होता है.

ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा पर बैठक में दिया गया विशेष ध्यान अत्यंत प्रासंगिक है. भारत जैसे विशाल देश में पेट्रोल, डीजल और उर्वरकों की आपूर्ति में जरा-सी बाधा भी व्यापक आर्थिक असंतुलन पैदा कर सकती है. ऐसे में राज्यों को जमाखोरी और कालाबाजारी के खिलाफ सख्त कदम उठाने के निर्देश न केवल आवश्यक हैं, बल्कि यह बाजार में विश्वास बनाए रखने के लिए भी अनिवार्य हैं. हाल के दिनों में ईंधन को लेकर फैली अफवाहों ने यह साबित किया है कि सूचना का संकट, वास्तविक संकट से कहीं अधिक खतरनाक हो सकता है.

भारतीय नागरिकों की सुरक्षा का मुद्दा इस पूरे परिदृश्य का सबसे संवेदनशील पक्ष है. खाड़ी देशों में लगभग एक करोड़ भारतीयों की उपस्थिति भारत की अर्थव्यवस्था और सामाजिक संरचना दोनों के लिए महत्वपूर्ण है. होर्मुज़ जलडमरूमध्य जैसे संवेदनशील क्षेत्र में फंसे भारतीयों को लेकर सरकार की चिंता स्वाभाविक है. इस संदर्भ में सरकार की सक्रिय कूटनीति और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता की परीक्षा भी हो रही है. यह आवश्यक है कि हर भारतीय, चाहे वह देश में हो या विदेश में, स्वयं को सुरक्षित और संरक्षित महसूस करे.

आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के लिए अंतर-मंत्रालयी समूह की सक्रियता एक सकारात्मक संकेत है. किसी भी संकट से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए निरंतर निगरानी और त्वरित निर्णय क्षमता अनिवार्य होती है. इसके साथ ही, प्रधानमंत्री द्वारा अफवाहों पर नियंत्रण और जनता के बीच विश्वास बनाए रखने की अपील भी अत्यंत महत्वपूर्ण है. आज के डिजिटल युग में सूचना का प्रवाह जितना तेज है, उतनी ही तेजी से भ्रम भी फैलता है, जो सामाजिक अस्थिरता को जन्म दे सकता है.

अंतत:, यह संकट भारत के लिए एक परीक्षा भी है और एक अवसर भी. परीक्षा इसलिए कि हमें अपनी प्रशासनिक क्षमता, समन्वय कौशल और आर्थिक मजबूती को साबित करना है. अवसर इसलिए कि हम एक जिम्मेदार और सक्षम राष्ट्र के रूप में वैश्विक मंच पर अपनी भूमिका को और सशक्त बना सकते हैं.रविवार को ‘मन की बात’ के माध्यम से प्रधानमंत्री का देशवासियों को एकजुट रहने का संदेश इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.

स्पष्ट है कि संकट का सामना केवल संसाधनों से नहीं, बल्कि सामूहिक संकल्प और समन्वित प्रयासों से किया जाता है. ‘टीम इंडिया’ की भावना यदि व्यवहार में उतरती है, तो कोई भी वैश्विक चुनौती भारत की प्रगति को रोक नहीं सकती.

 

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