गैस की किल्लत में मिट्टी के चूल्हों पर 4000 श्रद्धालुओं के लिए बनी महाप्रसादी

इंदौर:ईरान, इज़राइल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण पूरे विश्व में ऊर्जा संकट गहराता जा रहा है. ऐसे समय में इंदौर शहर के तुलसी नगर कॉलोनी के रहवासियों ने एक अनूठी मिसाल पेश की है- जहां एलपीजी सिलेंडर जैसे आधुनिक संसाधनों की कमी ने हमें हमारी समृद्ध परंपराओं की ओर लौटने का रास्ता दिखाया.राम नवमी के पावन अवसर पर तुलसी नगर स्थित अनंतेश्वर धाम में लगभग 4000 श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसादी तैयार की गई.

खास बात यह रही कि इस विशाल आयोजन में भोजन बनाने के लिए एलपीजी गैस सिलेंडर की कमी के चलते पारंपरिक मिट्टी के चूल्हों का सहारा लिया गया. आयोजकों ने बताया कि प्रारंभ में महाप्रसादी के लिए एलपीजी सिलेंडरों की व्यवस्था करने का प्रयास किया गया, लेकिन आवश्यक संख्या में सिलेंडर उपलब्ध नहीं हो सके. ऐसे में मंदिर परिसर के एक कोने में जमीन खोदकर देसी मिट्टी के चूल्हों का निर्माण किया गया. कॉलोनी में सूखे पेड़ों से लकड़ी एकत्रित कर चूल्हा जलाने की व्यवस्था की गई. इन पारंपरिक चूल्हों पर भोजन बनाने वाले कारीगरों ने पूरे श्रद्धा और समर्पण के साथ स्वादिष्ट पकवान तैयार किए, जिनका प्रसाद सभी श्रद्धालुओं ने आनंदपूर्वक ग्रहण किया.

प्राचीन परंपराओं को अपनाने की आवश्यकता
तुलसी नगर के रहवासियों ने इस नवाचार की सराहना करते हुए कहा कि वैश्विक ऊर्जा संकट के इस दौर में हमें अपनी प्राचीन भारतीय पाक परंपराओं को अपनाने की आवश्यकता है. यह पहल न केवल आत्मनिर्भरता का संदेश देती है, बल्कि पर्यावरण और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में भी एक प्रेरणादायक कदम है.

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