जबलपुर: मझौली में करोड़ों रुपए के धान घोटाले में जांच आगे बढ़ने के बावजूद मुख्य जिम्मेदारों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार समिति प्रबंधक और नोडल अधिकारी की भूमिका अहम मानी जा रही है, लेकिन वे अभी भी जांच के दायरे से बाहर नजर आ रहे हैं। जांच में सामने आया है कि आधार लिंक वेरिफिकेशन के जरिए फर्जी एंट्री की गई, जो बिना प्रबंधक की भूमिका के संभव नहीं मानी जा सकती है। वहीं नोडल अधिकारी द्वारा टोकन सत्यापन में बायोमेट्रिक प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया और किसानों की अनुपस्थिति में ही सत्यापन किए जाने की जानकारी मिली है, जिससे पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता संदिग्ध हो गई है।
सेटअप के आरोप, छोटे कर्मचारियों पर गिरी गाज
सूत्रों के अनुसार, समिति प्रबंधक के ऊपरी अधिकारियों से मजबूत संबंध होने के चलते कार्रवाई केवल निचले कर्मचारियों तक सीमित रखी गई। जिले के अन्य उपार्जन मामलों में जहां प्रबंधकों पर भी एफआईआर दर्ज होती रही है, वहीं इस मामले में सिर्फ प्रभारी और ऑपरेटर पर ही कार्रवाई होना कई सवाल खड़े करता है।
अन्य जिम्मेदार अधिकारी जांच से बाहर
करीब दो माह की देरी के बाद प्रशासन ने कार्रवाई शुरू करते हुए कुछ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। अब तक सर्वेयर और वेयरहाउस संचालक की गिरफ्तारी हुई है, जबकि अन्य जिम्मेदार अधिकारी जांच से बाहर हैं, जिससे निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं।
पूर्व में भी हुई प्रबंधकों पर कार्यवाही, अब क्यों नहीं?
कुछ अधिकारी यह तर्क दे रहे हैं कि प्रबंधक के पास कई केंद्रों की जिम्मेदारी थी, लेकिन पूर्व के मामलों में समान परिस्थितियों में भी प्रबंधकों पर कार्रवाई की गई है। ऐसे में प्रशासन के इस रुख को दोहरे मापदंड के रूप में देखा जा रहा है। इसके अलावा भुगतान और खरीदी प्रक्रिया में गड़बड़ी से नाराज किसान लगातार विरोध जता रहे हैं।
