आस्ट्रेलिया से डब्ल्यूटीओ के मत्स्य कोष को 20 लाख आस्ट्रेलियायी डॉलर की अतिरिक्त सहायता

नयी दिल्ली , 28 मार्च (वार्ता) आस्ट्रेलिया ने विश्व व्यापार सगठन (डब्ल्यूटीओ) के मत्स्य कोष में 20 लाख आस्ट्रेलियायी डॉलर का अतिरिक्त योगदान किया है। यह जानकारी डब्ल्यूटीओ की आधिकारिक वेबवाइट पर एक ताजा रिपोर्ट में दी गयी है। रिपोर्ट में कहा गया है,”आस्ट्रेलिया की सरकार ने डब्ल्यूटीओ फिश फंड (मत्स्य पालन वित्तपोषण तंत्र) में 20 लाख अस्ट्रेलियायी डॉलर का अतिरिक्त योगदान करने की प्रतिबद्धता जताई है। इसका उद्देश्य विकासशील और सबसे कम विकसित सदस्य देशों को ‘मत्स्य पालन सब्सिडी समझौते’ को लागू करने में सहायता प्रदान करना है।” आस्ट्रेलिया ने इससे पहले मई 2023 में इस कोष में 20 लाख आस्ट्रेलियायी डालर का योगदान किया था।

डब्ल्यूटीओ के 2022 के मंत्रिस्तरीय सम्मेलन में मत्स्य उद्योग-व्यापार पर एक आंशिक समझौता अपनाया गया था जिसमें गैर-कानूनी, बेहिसाब और अनियमित मछली पकड़ने पर सब्सिडी पर रोक लगाने का प्रावधान है। इसमें किसी एक समुद्री क्षेत्र से मछली पकड़ने की अतिशय क्रियाओं का आंशिक समाधान भी शामिल है। क्षमता से अधिक गतिविधियों और ज़रूरत से ज़्यादा मछली पकड़ने से जुड़ी सब्सिडी पर बातचीत अभी भी चल रही है, जहाँ भारत अपने छोटे मछआरों के हितों को लेकर चिंतित है। भारत का कहना है कि “विकासशील देशों को उस समस्या के लिए सज़ा न दी जाए, जिसे ज़्यादातर विकसित देशों ने पैदा किया है।”

भारत चाहता है कि सभी देशों को एक पलड़े पर तौलने की बजाय और ‘सबके लिए एक जैसा’ प्रतिबंध लगाने की बजाय जिम्मेदारी से मछली पकड़ने का कारोबार करने वाले देशों के साथ निष्पक्षता के साथ व्यवहार किया जाए, सब्सिडी हटाने के लिए विकासशील देशों के लिए समय-सीमा लम्बी रखी जाए और संवेदनशील मछुआरा समुदायों के लिए सुरक्षा के विशेष उपाय किये जाएं। भारत का तर्क है कि यदि प्रति मछुआरा सब्सिडी को देखा जाए तो उसकी सब्सिडी यूरोपीय संघ, अमेरिका और चीन जैसे बड़े मछली पकड़ने वाले देशों की तुलना में उसकी सब्सिडी बहुत कम है। इसमें झटके से कमी करने से भारतीय मछुआरों को बुरी तरह नुकसान होगा। भारत का यह भी कहना है कि उसके लिये यह बड़ी संख्या में गरीब मछुआरों की खाद्य सुरक्षा का प्रश्न है।

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