विश्व व्यापार संगठन के मंच पर गरजे पीयूष गोयल, विकासशील देशों के लिए मांगा व्यापार का बराबर हक, उरुग्वे दौर की विसंगतियां दूर करने की उठाई पुरजोर मांग

याउंडे (कैमरून) | केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कैमरून के याउंडे में आयोजित 14वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन (MC14) को संबोधित करते हुए विश्व व्यापार संगठन (WTO) के मंच से विकासशील देशों के हितों की जमकर वकालत की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वैश्विक व्यापार में नवाचार, विकास और अवसरों का बंटवारा सभी सदस्य देशों के बीच समान रूप से होना चाहिए। गोयल ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि ‘उरुग्वे दौर’ के समय से चली आ रही व्यापारिक विसंगतियों को अब दूर करने का समय आ गया है। उन्होंने दोहराया कि बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली तभी सफल मानी जाएगी, जब हर राष्ट्र को अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने और वैश्विक बाजार में सार्थक भागीदारी का उचित अवसर मिले।

सम्मेलन के इतर पीयूष गोयल ने वैश्विक व्यापार जगत के कई प्रभावशाली नेताओं के साथ उच्च स्तरीय द्विपक्षीय बैठकें कीं। उन्होंने अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीर से मुलाकात कर भारत-अमेरिका व्यापार समझौते (BTA) के अगले चरणों पर चर्चा की। साथ ही, कनाडा की अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंत्री मनिंदर सिद्धू के साथ ‘व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते’ (CEPA) की प्रगति की समीक्षा की। इसके अलावा, न्यूजीलैंड के साथ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को अंतिम रूप देने और मोरक्को सहित कैरिबियाई देशों के साथ निवेश बढ़ाने के रास्तों पर भी विस्तार से बातचीत हुई। इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य भारत के व्यापारिक हितों को वैश्विक पटल पर प्राथमिकता दिलाना रहा।

पीयूष गोयल ने भारत के “सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय” के सिद्धांत को दोहराते हुए कहा कि नई तकनीकों और आर्थिक अवसरों का लाभ केवल कुछ विकसित देशों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने आह्वान किया कि वैश्विक व्यापार का फायदा दुनिया के सबसे गरीब और पिछड़े देशों तक भी पहुंचना चाहिए ताकि एक समावेशी विकास सुनिश्चित हो सके। भारत ने स्पष्ट किया कि वह WTO को वैश्विक व्यापार के केंद्र में बनाए रखने और निष्पक्ष व्यापार प्रणालियों को लागू करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। मंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है जब दुनिया भर में नई व्यापारिक चुनौतियां और आर्थिक बाधाएं उभर रही हैं।

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