
बागली। सात समंदर पार सोशल मीडिया के जरिए सनातन धर्म को अपनाने के पहले 32 वर्षीय इसाई युवक ब्लादिमीर आरंभ में सोशल मीडिया केजारी बीज मंत्र लेकर संतुष्ट हो गए फिर वीजा लेकर भारत आए और भिंड के आश्रम में दीक्षा लेकर बजरंग दास बन गए मामला यू है 12 अप्रैल 2025 को भींड के स्वामी कृष्ण चेतन्य ब्रह्मचारी महाराज अपने शिष्य के पास उडुपी गए वहां पर शिष्य द्वारा बताया गया कि उनके ऑस्ट्रिया के रहने वाले मित्र ब्लादिमीर आपसे चर्चा करना चाहते हैं। इस समय वीडियो कॉल के जरिए दोनों के बीच करीब 2 घंटे तक आपस में चर्चा हुई तभी महाराज जी ने आस्ट्रीया निवासी ब्लादिमीर को गुप्त बीज मंत्र दिया जिस दिन दोनों की चर्चा हुई वह तारीख 12 अप्रैल 2025 हनुमान जयंती थी। बीज मंत्र को लेकर 2 महीने तक ब्लादिमीर ने जादुई आभास का अनुभव किया और वह वीजा लेकर 12 जून को भारत आ गए यहां पर आकर भिंड स्थित स्वामी जी के आश्रम में कुछ दिनों तक रहकर शक्तिपात नियमों के अनुसार कठिन रहन-सहन रखते हुए दीक्षा ली और अपना नाम ब्लादिमीर से बजरंगदास कर लिया गुरु आज्ञा से उनका नाम अब भारत में बजरंगदास के रूप में पुकारा जाता है।
*शरद पूर्णिमा पर बागली आगमन हुआ गुरु शिष्य का मिलन भी हुआ*
शरद पूर्णिमा अवसर पर बागली के वाग्योग आश्रम पर गुरु भिंड से आए और शिष्य ऑस्ट्रिया से 5 अक्टूबर को आए और 6 अक्टूबर सोमवार को शरद पूर्णिमा अवसर पर गुरुशिष्य दोनों शामिल हुए इस दौरान उनके दीक्षा गुरु स्वामी कृष्ण चैतन्य महाराज का आशीर्वाद लिया ऑस्ट्रेलिया निवासी बजरंगदास ने हमारे संवाददाता को बताया कि ऑस्ट्रिया निवासी ब्लादिमीर जो वर्तमान बजरंग दास बन गए हैं ।उन्हें सनातन की इतनी लगन है प्रतिदिन हनुमान चालीसा पाठ करना उनकी दैनिक दिनचर्या में शामिल है इस दौरान बजरंगदास ने लोकप्रिय भजन हरे रामा हरे कृष्णा भी संगीत के साथ गाकर आश्चर्यचकित कर दिया।
