मुंबई | भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों ने देश की आर्थिक सेहत को लेकर एक बड़ा संकेत दिया है। 20 मार्च, 2026 को समाप्त हुए सप्ताह के दौरान भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 11.413 अरब डॉलर की भारी गिरावट के साथ 698.346 अरब डॉलर पर आ गया है। यह लंबे समय बाद हुआ है जब भारत का विदेशी मुद्रा कोष 700 अरब डॉलर के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे गिरा है। हालांकि, आर्थिक जानकारों का कहना है कि यह गिरावट मुख्य रूप से सोने की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में आई कमी की वजह से है, न कि अर्थव्यवस्था में किसी बुनियादी कमजोरी के कारण। आरबीआई के अनुसार, समीक्षाधीन सप्ताह में स्वर्ण भंडार का मूल्य 13.495 अरब डॉलर कम होकर 117.186 अरब डॉलर रह गया है।
भंडार में आई इस बड़ी गिरावट के बीच एक सकारात्मक पहलू यह है कि विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों (FCA) में 2.127 अरब डॉलर की वृद्धि दर्ज की गई है, जो अब बढ़कर 557.695 अरब डॉलर हो गई है। इसका सीधा अर्थ यह है कि डॉलर और अन्य वैश्विक मुद्राओं के रूप में भारत के पास मौजूद नकद भंडार अभी भी मजबूत हो रहा है। आमतौर पर विदेशी मुद्रा भंडार में कमी तब आती है जब आरबीआई रुपये की वैल्यू को स्थिर रखने के लिए बाजार में डॉलर बेचता है या जब विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से अपना पैसा निकालते हैं। वर्तमान स्थिति में सोने के वैश्विक भाव गिरने से भंडार की कुल वैल्यू कम हुई है, जिसे एक तकनीकी समायोजन माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि $11 अरब की गिरावट दिखने में बड़ी जरूर है, लेकिन इससे घबराने की आवश्यकता नहीं है। भारत के पास वर्तमान में जितना विदेशी मुद्रा भंडार मौजूद है, वह लगभग 11 महीनों से अधिक के आयात खर्च को आसानी से वहन करने के लिए पर्याप्त है। दुनिया की अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में भारत की स्थिति अब भी काफी सुरक्षित और स्थिर बनी हुई है। रिजर्व बैंक वैश्विक परिस्थितियों और कच्चे तेल की कीमतों पर पैनी नजर रखे हुए है ताकि भारतीय अर्थव्यवस्था को किसी भी संभावित झटके से बचाया जा सके। उम्मीद है कि सोने की कीमतों में स्थिरता आते ही भंडार के आंकड़ों में पुनः सुधार देखने को मिलेगा।

