पिता के प्यार और सम्मान में ये दिन दुनिया भर में मनाया जाता है। इस खास दिन को हर कोई अलग तरह से सेलिब्रेट करता है। हम आपको पापा के फेमस डायलॉग सुनाते हैं।
दुनिया भर में रिश्तों को सम्मान देने के लिए कुछ दिन तय किए जाते हैं, जिसे सेलिब्रेट किया जाता है। जैसे मां के लिए मदर्स डे मनाया जाता है। वैसे ही पिता के रिश्ते को सम्मान देने के लिए फादर्स डे मनाया जाता है। फादर्स डे हर साल जून के तीसरे रविवार को मनाया जाता है। दुनिया भर के अलग- अलग देशों में फादर्स डे को अलग-अलग अंदाज में मनाया जाता है।
कुछ लोग इस दिन अपने पिता के साथ बाहर घूमने जाते हैं, तो कई लोग इस दिन पिता के लिए स्पेशल खाना बनाते हैं। बहुत से बच्चे अपने पिता को गिफ्ट देकर स्पेशल महसूस कराते हैं।
इन सबके बीच पापा घर में इकलौते ऐसे होते हैं, जो अपने इमोशन को कभी भी खुलकर जाहिर नहीं करते हैं, लेकिन हर घर में पापा एक ही तरह के डायलॉग मारते हैं, जो लाइफ लेशन की तरह होती है। कभी-कभी वो फनी लगते हैं, लेकिन उन डायलॉग में उनके जीवन भर के अनुभव समेटे हुए होते हैं।
आइए देखते हैं क्या हैं वो डायलॉग (Famous Father’s Dialogue)
मेरा घर, मेरे नियम
यह बहुत आम कहावत हैं, जो हर भारतीय घर में कम से कम दो बार तो सुनने को मिलती ही है, खासकर तब जब आप टाइम पर घर न पहुंचे। किसी भी एक दिन अगर आप रात को घर देरी से पहुंचते हैं, तो आपको यह डायलॉग जरूर सुनने को मिला होगा।
पैसे पेड़ पर नहीं उगते हैं
जब भी आप कुछ खरीदने की बात करो, पापा की ओर से ये लाइन बड़ी ही फुर्ती से आती है। इस डायलॉग के जरिए वो कहना चाहते हैं कि फिजूल खर्ची न करें। इसमें पैसे को सेव करने का सुझाव छिपा होता है।
तुम जानो, तुम्हारा काम जाने
जब भी आप पापा से किसी चीज के लिए इजाज़त मांगने जाते हैं, खास तौर पर कहीं जाने या घूमने के लिए तो सीधा मना नहीं करने की बजाए वो कहते हैं “मेरी तरफ़ से ना है, बाकी तुम्हारी मर्जी”… हमारी मर्जी? मतलब उनकी न है और आप नहीं जा सकते हैं।

जिस दिन खुद कमाओगे….
जब आप कुछ भी उनसे बिना पूछे, अपने आप से अपने लिए ख़रीद लीजिए, वो भले ही जींस हो या सड़क पर बिक रही मूंगफली, हर भारतीय पापा ये डायलॉग जरूर बोलते हैं- उड़ाओ-उड़ाओ बाप के पैसे, क्या चिंता करनी, जिस दिन कमाओगे उस दिन पता चलेगा।
हमारे जमाने में…
ज्यादातर समय इस लाइन के बाद एक कहानी सुनाई जाती है, जिसमें वो बताते हैं कि कैसे उन्होंने अपने समय में कम रिसोर्सेज में भी ज्यादा मेहनत करते थे और कम में भी संतुष्ट रहते थे। कभी-कभी ये सुनकर हमें लगता है कि लेक्चर चल रहा है, लेकिन असल में वो हमें स्ट्रॉन्ग और प्रैक्टिकल बनाना चाहते हैं।
मैंने पहले ही कहा था
जब भी हम पापा की बात को इग्नोर करते हुए कोई काम कर लेते हैं और गलती से वो काम खराब हो जाए, तब ये लाइन “मैंने पहले ही कहा था….” हमें सुनने को मिलती है कि मैंने पहले ही कहा था। लेकिन साथ में ये भी याद दिलाता है कि उनकी बात में अक्सर अनुभव छुपा होता है।
लाइट बंद करो, बिजली का बिल आता है!
इस लाइन में केवल बिजली बचाने की बात नहीं होती, बल्कि जिम्मेदारी की आदत सिखाने की कोशिश होती है। छोटी-छोटी चीजों में भी बचत करना और रिसोर्सेस की वैल्यू समझना, इस लाइन में यही मैसेज छिपा होता है।
