जवारों का विसर्जन, गूंजे “जय माता दी” के जयकारे

जबलपुर: नवमी के इस पावन अवसर पर जबलपुर में हर ओर भक्ति की लहर देखने को मिली। मंदिरों से लेकर घरों तक मां दुर्गा की आराधना हुई और पूरा शहर “जय माता दी” के जयकारों से गूंज उठा। सुबह से ही शहर के प्रमुख देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी, जहां भक्तों ने पूरे विधि-विधान से मां दुर्गा की आराधना कर अपनी मनोकामनाएं पूर्ण होने की प्रार्थना की। शहर के बड़ी खेरमाई मंदिर, काली धाम मंदिर, बूढ़ी खेरमाई मंदिर और सदर काली मंदिर सहित शहर के प्रमुख देवी धामों में नवमी के दिन विशेष पूजा-अर्चना की गई। उपवास रखकर पहुंचे श्रद्धालुओं ने माता रानी के दर्शन किए और आशीर्वाद प्राप्त किया। मंदिरों में सुबह से देर शाम तक लंबी कतारें लगी रहीं। इसके साथ ही नवरात्रि के दौरान स्थापित ज्वारों का विधिवत विसर्जन किया गया।
ज्वारों की परंपरा और विसर्जन का महत्व
नवरात्रि के दौरान स्थापित किए गए “ज्वारे” नवमी पर विशेष रूप से पूजे गए और इसके बाद उनका विधिवत विसर्जन भी किया गया। शहर के मंदिरों एवं विभिन्न स्थानों पर रखे गए ज्वारों को श्रद्धा के साथ जल में प्रवाहित किया गया। यह परंपरा मां दुर्गा की कृपा और आशीर्वाद के प्रतीक के रूप में मानी जाती है। मान्यता है कि ज्वारों की हरियाली भक्तों की मनोकामनाओं की पूर्ति का संकेत देती है।
घर-घर हवन-पूजन, भक्तिमय माहौल
नवमी के अवसर पर शहर के घरों में भी हवन-पूजन का आयोजन किया गया। भक्तों ने अपने-अपने घरों में विधि-विधान से हवन कर देवी मां को प्रसन्न करने का प्रयास किया। इससे पूरे शहर में आध्यात्मिक ऊर्जा और सकारात्मकता का संचार हुआ।

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