
छतरपुर। परीक्षा के परिणामों का दबाव किस कदर मासूमों के मानसिक स्वास्थ्य पर हावी हो रहा है, इसकी एक विचलित करने वाली तस्वीर छतरपुर से सामने आई है। यहाँ कक्षा 9वीं में फेल होने के डर और लोक-लाज के दबाव में एक 14 वर्षीय छात्रा ने मौत को गले लगाने का प्रयास किया। छात्रा ने घर में रखी हेयर डाई पी ली, जिसके बाद उसे गंभीर हालत में जिला अस्पताल भर्ती कराया गया है।
खामोश रहकर घुटती रही मासूम
मिली जानकारी के मुताबिक, रिजल्ट आने के बाद छात्रा बुरी तरह टूट गई थी। उसने अपनी असफलता की बात परिजनों से साझा नहीं की और अंदर ही अंदर इस तनाव में जीती रही कि माता-पिता की नाराजगी का सामना कैसे करेगी। इसी मानसिक दबाव (Mental Pressure) के चलते उसने यह आत्मघाती कदम उठा लिया। जब तबीयत बिगड़ने लगी, तब उसने अपनी बहन को आपबीती सुनाई, जिसके बाद हड़कंप मच गया।
परिजनों की अपील: “हम डांटते नहीं, समझाते”
अस्पताल में मौजूद परिजनों का गला भर आया। उनका कहना है कि अगर बेटी एक बार भी अपनी परेशानी बता देती, तो वे उसे संभाल लेते। परिजनों ने अन्य अभिभावकों से भी अपील की है कि वे बच्चों के साथ दोस्त बनकर रहें ताकि वे अपनी विफलता बताने से न डरें।
विशेषज्ञों की राय: ‘रिजल्ट आखिरी फैसला नहीं’
मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि बच्चों में बढ़ता ‘परफॉरमेंस प्रेशर’ उन्हें मानसिक रूप से कमजोर कर रहा है। एक परीक्षा में अंक कम आना या फेल होना जीवन का अंत नहीं है। समाज और परिवार को बच्चों को यह भरोसा दिलाना होगा कि उनका जीवन किसी भी मार्कशीट से कहीं ज्यादा कीमती है।
