सतना: शहर के विकास की उम्मीद और आगामी बजट की प्रत्याशा के बीच बुधवार को महापौर योगेश ताम्रकार की अध्यक्षता में मेयर इन काउंसिल की बैठक हुई। बैठक में शामिल ग्यारह प्रस्तावों में से नौ प्रस्तावों को मंजूरी मिल गई। लेकिन प्रस्तावों के अलावा महापौर और कमिश्नर के बीच जारी विवाद ने एक बार फिर सुर्खियां बटोरी।
एमआईसी की बैठक में महापौर के तीखे तेवर देखने को मिले। उन्होंने कमिश्नर से साफ कहा, आप राजनीति मत करिए, जनता के काम मत रोकिए। पार्षदों के कार्यों में भेदभाव पर भडक़ते हुए महापौर ने कहा कि जब इंजीनियर फाइलों को स्वीकृति दे चुके हैं तो चुनिंदा काम करना गलत है। महापौर ने चेतावनी देते हुए पूछा कि यदि पार्षद निधि लैप्स हो गई तो जवाबदेही किसकी होगी? उन्होंने कहा कि पार्षद व्यक्तिगत नहीं बल्कि जनता के हित में काम कर रहे हैं, प्रशासन को केवल उचित निगरानी करनी चाहिए।इसी कड़ी में वार्ड क्रमांक तीन के पार्षद अभिषेक तिवारी अंशू ने शहर में दूषित पेयजल आपूर्ति का मुद्दा उठाया। उन्होंने डेस्क पर रखी पानी से भरी तांबे की बोतल को फेंकते हुए कहा कि जब पूरा शहर गंदा पानी पी रहा है तो हम साफ पानी क्यों पीएं। उन्होंने पेयजल प्रभारी से सवाल किया कि इतने संसाधन होने के बावजूद शुद्ध पानी की आपूर्ति क्यों नहीं हो पा रही है। जवाब में रोजल प्रताप सिंह ने कहा कि जहां समस्या समझ में आती है उसे दूर कर देते हैं।
भेदभाव के आरोप
महापौर योगेश ताम्रकार ने भरी बैठक में कमिश्नर से पूछा कि पार्षदों की फाइलें क्यों नहीं पास हो रही हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि तीस मार्च तक पार्षद निधि लैप्स हो जाएगी। सूत्रों का आरोप है कि कमिश्नर उन्हीं पार्षदों की फाइलों को अटकाए हुए हैं जिन्होंने कलेक्टर के समक्ष कमिश्नर के विरुद्ध शिकायत पर हस्ताक्षर किए थे।
महापौर ने खारिज किया प्रस्ताव
नगर निगम में दो मस्टर कर्मचारियों कीर्ति सिंह और सरिता सिंह को सेवा से अलग करने के मामले पर भी चर्चा हुई। महापौर ने बताया कि दोनों को हाईकोर्ट से स्टे मिल चुका है। सूत्रों ने बताया कि छह अप्रैल को हाईकोर्ट ने कमिश्नर को तलब किया है। बैठक में प्रस्ताव दस और ग्यारह नंबर के प्रस्ताव में दोनों का मामला रखा गया था, जिसमें दोनों को छोड़ शेष सभी मस्टर श्रमिकों को ९९ दिनों की सेवावृद्धि का प्रस्ताव रखा गया था।
फिर गर्माया अग्निशमन प्रभार
बैठक में एक बार फिर मूल पद के फायर अधीक्षक आरपी सिंह परमार को लूप में रखकर मैकेनिकल इंजीनियर सुलभ पाठक को प्रभार देने का मामला उठा। पार्षद अभिषेक तिवारी ने पूछा कि जब मूल फायर अधीक्षक मौजूद हैं तो मैकेनिकल इंजीनियर को प्रभार क्यों दिया गया। कमिश्नर ने कहा कि इसे अगले बैठक में रखे जिस पर महापौर ने कहा नहीं इस बैठक में चर्चा होगी।
जारी हुई एनओसी की होगी जांच
इसके बाद एमआईसी ने एक साल में जारी हुई सभी फायर एनओसी की जांच करने का फैसला लिया। तय हुआ कि एमआईसी सदस्य और नगर निगम के दो अधिकारी इसकी जांच करेंगे। सूत्रों ने बताया कि जन सुरक्षा से जुड़े मामले में नियमों को ताक पर रखकर करीब आठ प्रतिष्ठनों को फायर एनओसी जारी कर दी गई थी। हैरानी की बात यह है कि बिल्डिंग अनुमोदन का प्रभार भी मैकेनिकल इंजीनियर सुलभ पाठक को दे दिया गया है, जबकि यह जिम्मेदारी सिविल इंजीनियर की होनी चाहिए।
परिषद के लिए भेजा गया बजट
बैठक में वित्तीय वर्ष २०२६-२७ का बजट प्रस्ताव पेश किया गया। सडक़ निर्माण के लिए ३० करोड़ रुपये से बढ़ाकर ३५ करोड़ रुपये और सडक़ रखरखाव के लिए ३ करोड़ से बढ़ाकर ६ करोड़ रुपये कर दिए गए। अन्य विकास कार्यों में भी आंशिक संशोधन किए गए। संशोधित बजट प्रस्ताव अब परिषद की मंजूरी के लिए भेज दिया गया है।
विशेष सम्मिलन की संभावना 30 को
एमआईसी की मंजूरी के बाद तय हो गया है कि बजट अब विशेष सत्र में रखा जाएगा। सूत्र बताते हैं कि 30 मार्च को स्पीकर राजेश चतुर्वेदी बजट के लिए विशेष सम्मेलन बुला सकते हैं। बैठक में दूषित पानी की समस्या और नियुक्ति विवाद पर आगे चर्चा होने की संभावना है। शहरवासी अब विकास कार्यों और शुद्ध पेयजल आपूर्ति को लेकर महापौर और प्रशासन दोनों से उम्मीद लगाए बैठे हैं।
