नौकरी से निकालने पर समाप्त हो जाता है अर्जित अवकाश के नकदीकरण का अधिकार: हाईकोर्ट 

जबलपुर। हाईकोर्ट जस्टिस विशाल धगट की एकलपीठ ने अपने अहम आदेश में कहा है कि नौकरी से निकाले जाने पर अर्जित अवकाश के नकदीकरण का अधिकार समाप्त हो जाता है। एकलपीठ ने उक्त आदेश के साथ भ्रष्टाचार व धोखाधडी के अपराध में दोषी करार दिये जाने के बाद अर्जित अवकाश नगदीकरण की राशि प्रदान नही किये जाने को चुनौती दी गयी थी।

भोपाल के इंद्रपुरी सेक्टर निवासी प्यारे लाल रावत की तरफ से दायर की गयी याचिका में कहा गया था कि वह जल संसाधन विभाग से सेवानिवृत्त हुए थे। उन्होंने अर्जित अवकाश के नकदीकरण के लिए आवेदन किया था। जिसे नवम्बर 2021 में इस आधार पर खारिज कर दिया गया था कि उसे धारा 420,120 तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दोषी करार दिया है। सिविल सर्विसेज (पेंशन) रूल्स, 1976 के रूल 64(1)(ब) के तहत भुगतान की गई प्रोविजनल पेंशन व ग्रेच्युटी कार्रवाई खत्म होने पर एडजस्ट करने के बाद किया जाता है।याचिकाकर्ता की तरफ से तर्क दिया गया कि हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि कोई प्रावधान नहीं है, आपराधिक प्रकरण लंबित होने के कारण व्यक्ति अर्जित अवकाश का नकदीकरण नहीं करवाने के अयोग्य होगा।

विभाग की तरफ से कहा गया कि सिविल सर्विसेज (पेंशन) रूल्स, 1976 के रूल 64(1)(ब) के तहत अर्जित अवकाश के नकदीकरण को निरस्त किया है। विभागीय जांच तथा न्यायालय में प्रकरण लंबित होने के कारण सेवानिवृत्त कर्मचारियों को सिर्फ 50 प्रतिशत पेंशन व ग्रेच्युटी की राशि प्रदान की जाती है। सजा के खिलाफ उसने अपील दायर की है जो लंबित है। याचिकाकर्ता दोषमुक्त हो जाता है तो अंतिम रिटायरमेंट बेनिफिट्स में उसे एडजस्ट किया जाएगा।

एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि सिविल सर्विसेज (पेंशन) रूल्स, 1976 के रूल 64(1)(ब) के अनुसार सरकारी कर्मचारी को दी जाने वाली प्रोविजनल पेंशन को उसके खिलाफ विभागीय जांच या न्यायिक कार्यवाही पूरी होने के बाद सरकारी कर्मचारी को फाइनल रिटायरमेंट बेनिफिट्स का पेमेंट करते समय एडजस्ट किया जाएगा। इसे रूल 60 के साथ पढ़ने पर डिपार्टमेंटल जांच या कोर्ट की कार्रवाई के पेंडिंग रहने के दौरान सरकारी कर्मचारी की अर्जित अवकाश नगदीकरण रोकने का कोई नियम नहीं है।

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