
शाजापुर। आपदा में अवसर ढूंढने में शाजापुर गैस एजेंसियां माहिर हैं. कई उपभोक्ताओं को पता ही नहीं है कि उनके नाम से कब टंकी बुक हो गई और कब डिलीवर हो गई. नवभारत ने ऐसे कई उपभोक्ताओं के नंबर बुकिंग केंद्र पर फोन लगाया, तो पता चला कि उपभोक्ता के नंबर बुक होकर उनकी टंकी डिलीवर हो गई, लेकिन असल में उन उपभोक्ताओं को नहीं मिली, जिनके नाम से कनेक्शन है. याने कि गैस एजेंसियों द्वारा धड़ल्ले से ब्लैक में सिलेंडर बेचे जा रहे हैं.
एक उपभोक्ता का कनेक्शन नंबर 5502 और 32717 है. इस नंबर से उपभोक्ता ने कोई बुकिंग नहीं की, लेकिन जब उपभोक्ता ने बुक करने के लिए फोन किया, तो पता चला कि ये टंकी 9 मार्च को ही डिलीवर हो गई. अब सवाल यह उठता है कि जब ये टंकी उपभोक्ता को नहीं मिली, तो ये टंकी गई कहां. और किसने इसे बुक किया. प्रशासन को चाहिए कि शाजापुर की तीनों गैस एजेंसियों की यदि बारीकी से जांच करें, तो बुकिंग के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा और बड़ी मात्रा में ब्लैक की गई टंकियों की जानकारी लग सकती है.
6, 9 और 11 मार्च को सबसे ज्यादा फर्जी बुकिंग…
गैस एजेंसियों पर सबसे ज्यादा फर्जी उपभोक्ताओं के नाम पर 6, 9 और 11 मार्च को बुकिंग हुई. इन तारीखों पर जो टंकी बुक हुई, वो डिलीवर भी हो गई, लेकिन उन उपभोक्ताओं को नहीं मिली, जिनके नाम से कनेक्शन है, तो आखिर टंकी गई कहां. याने सीधी ब्लैक कर दी गई.
ब्लैक में बिक रहे गैस सिलेंडर…
शाजापुर में तीन गैस एजेंसियां है. जिनमें कुछ गैस एजेंसियों में खुलेआम उपभोक्ताओं के नाम से फर्जी तरीके से बुकिंग कर उनकी टंकियों को दो-दो हजार में बेचा जा रहा है. जब उपभोक्ता टंकी बुक करने के लिए फोन करता है, तो पता चलता है कि उनके नाम की टंकी बुक हो गई है और डिलीवर भी हो गई है. यही कारण है कि लोग गैस की टंकी के लिए परेशान हैं और बुकिंग नंबर पर उपभोक्ताओं को मैसेज मिलता है कि आपकी टंकी डिलीवर कर दी गई है. जिला प्रशासन और आपूर्ति विभाग को चाहिए कि वे सभी गैस एजेंसियों की बारीकी से जांच करें और जिन उपभोक्ताओं के नाम से फर्जी बुकिंग की गई, यदि उनसे चर्चा करें, तो फर्जी बुकिंग और टंकी की कालाबाजारी का घोटाला उजागर हो जाएगा.
कोरोना में मेडिकल वालों की, तो अब पम्प-गैस एजेंसी वालों की पूछपरख बढ़ी
कोरोना काल में जिस तरीके से मेडिकल वालों की पूछपरख बढ़ गई थी. लोग रेमडेसिविर इंजेक्शन के लिए हर मेडिकल स्टोर पर धोक दे रहे थे. उसकी याद अब पेट्रोल पम्प और गैस एजेंसी पर लगने वाली कतारों ने ताजा कर दी है. पेट्रोल पम्प पर उमड़ी भीड़ को देखते हुए लोग पेट्रोल पम्प मालिकों से पेट्रोल-डीजल की गुहार लगा रहे हैं. तो वहीं गैस एजेंसी के मालिक और कर्मचारी भी इन दिनों पूछपरख में पीछे नहीं हैं. गौरतलब है कि बीती रात अचानक किसी ने अफवाह फैला दी कि पेट्रोल-डीजल खत्म हो गया है, जिसके बाद पेट्रोल पम्पों पर वाहनों की लंबी कतार लगना शुरू हो गई. रात 12 बजे बाद तक लोग पेट्रोल-डीजल डलवाने के लिए वाहनों के साथ पम्प पर कतारों में जमे रहे. शाजापुर शहर में कुल 5 पेट्रोल पम्प हैं, जिनमें 3 पम्पों पर पहले से ही पेट्रोल-डीजल खत्म है. इस कारण दो पेट्रोल पम्पों पर अचानक भीड़ उमड़ी. यहां तक कि फोरलेन पर जिन पेट्रोल पम्पों पर मक्खियां भिनभिनाती थी, वहां भी गाडिय़ों की दो-दो किलोमीटर तक लाइन लगी हुई थी. प्रशासन का कहना है कि डीजल-पेट्रोल की कोई कमी नहीं है. लेकिन अफवाह के चलते लोग मानने को तैयार ही नहीं है. लोगों को लग रहा है कि कहीं ऐसा न हो कि डीजल-पेट्रोल खत्म हो जाए और वे वंचित हो जाएं. जिस प्रकार कोरोना काल में इंजेक्शन के लिए लोग बेचैन थे. उसी प्रकार डीजल-पेट्रोल के लिए लोग परेशान दिख रहे हैं. यही हाल रसोई गैस का भी है. शहर में तीन गैस एजेंसी हैं, लेकिन उसके बाद भी लोग टंकियां स्टॉक करने में लगे हुए हैं.
