
सिलवानी। आजादी के 78 वर्ष बीत जाने के बावजूद जनपद पंचायत सिलवानी की ग्राम पंचायत पड़रिया कला अंतर्गत आदिवासी बहुल ग्राम डुंगरिया खुर्द आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझ रहा है। गांव तक पक्की सड़क नहीं होने से ग्रामीणों का जीवन मानो ‘काला पानी’ जैसी कठिन परिस्थितियों में गुजर रहा है।
सिर्फ 2 किलोमीटर की दूरी बना अभिशाप
ग्राम सियलबाड़ा से डुंगरिया खुर्द की दूरी महज 2 किलोमीटर है लेकिन यह रास्ता उबड़-खाबड़ पत्थरीला और पूरी तरह कच्चा है। हालात इतने खराब हैं कि चार पहिया वाहन गांव तक नहीं पहुंच पाते। बारिश के दिनों में स्थिति और भी भयावह हो जाती है, जिससे ग्रामीणों का बाहरी दुनिया से संपर्क लगभग टूट जाता है।
शिक्षा पर ताला छात्राओं ने छोड़ी पढ़ाई
गांव में केवल कक्षा 5वीं तक ही स्कूल संचालित है। आगे की पढ़ाई के लिए बच्चों को दूसरे गांव जाना पड़ता है। खराब सड़क और सुरक्षा की चिंता के चलते कई छात्राओं ने स्कूल जाना छोड़ दिया है जिससे उनके भविष्य पर संकट मंडरा रहा है।
350 आबादी, लेकिन विकास नदारद
करीब 350 की आबादी वाले इस गांव में सड़क, स्वास्थ्य शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव है। बीमार पड़ने पर मरीजों को खाट या बाइक से ले जाना पड़ता है जिससे कई बार समय पर इलाज नहीं मिल पाता।
कागजों में विकास हकीकत में भ्रष्टाचार के आरोप
ग्रामीणों ने पंचायत पर गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रेम सिंह अहिरवार, बलराम भिलाला, मुकेश यादव, शंकर यादव सहित अन्य ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत में विकास कार्यों के नाम पर लाखों रुपए का आहरण कर लिया गया जबकि जमीनी स्तर पर कोई काम नहीं हुआ।
ग्रामीणों का आरोप है कि सचिव, रोजगार सहायक और सरपंच की मिलीभगत से फर्जी निर्माण कार्य दिखाकर शासकीय राशि निकाल ली गई।
शिकायतें कई स्तर पर कार्रवाई शून्य
ग्रामीणों ने तहसील सिलवानी जिला और भोपाल तक शिकायतें दर्ज कराई हैं लेकिन अब तक किसी प्रकार की ठोस जांच या कार्रवाई नहीं हुई है। इससे ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
इनका कहना है
मीडिया के माध्यम से जानकारी प्राप्त हुई है शीघ्र ही सड़क के संबंध में परीक्षण कराया जायेगा, किस कारण से सड़क का निर्माण का रुका हुआ है। पंचायत में बगैर निर्माण के जो राशि का आहरण हुआ है तथा अधूरे निर्माण कार्यों की भी जांच करा कर कार्रवाई की जायेगी।
कमल सोलंकी, जिला पंचायत सीईओ रायसेन
