जबलपुर: जिला अस्पताल में पदस्थ चिकित्सक डॉ आशुतोष अग्निहोत्री ने रासायनिक खाद और कीटनाशकों के दुष्प्रभावों को देखते हुए अपने फार्म में जैविक खेती अपनाई है। वे न केवल अपनी फसलों को सुरक्षित तरीके से उगाते हैं, बल्कि आसपास के किसानों को भी जैविक खेती के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। शहपुरा विकासखंड के ग्राम कमतीया में स्थित अपने 5 एकड़ के फार्म में डॉ अग्निहोत्री ने देसी गाय पालन, बायोगैस प्लांट और कंपोस्टिंग पिट का उपयोग किया है। वे गोबर और गौ मूत्र का छिड़काव और सिंचाई के साथ आधुनिक तरीके से कर रहे हैं। उनके फार्म में आम, चीकू, चिरौंजी और शहतूत के फलदार वृक्षों की विभिन्न किस्में लगी हैं, साथ ही गेहूं, चना, अरहर, मूंग और उड़द की फसलें भी उगाई जा रही हैं।
कृषि विभाग ने सराहा प्रयास
कृषि विभाग के अधिकारियों ने डॉ अग्निहोत्री के फार्म का अवलोकन किया। उप संचालक कृषि डॉ एस के निगम, अनुविभागीय कृषि अधिकारी पाटन डॉ इंदिरा त्रिपाठी और स्थानीय कृषि अधिकारी इस अवसर पर मौजूद थे। डॉ एस के निगम ने कहा कि जैविक खेती से न केवल भूमि की उर्वरता बनी रहती है, बल्कि पर्यावरण संतुलन और जैव विविधता के संरक्षण में भी योगदान मिलता है।
स्वास्थ्य, कृषि और पर्यावरण का समन्वय
डॉ अग्निहोत्री का यह प्रयास स्वास्थ्य, कृषि और पर्यावरण के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। उनके फार्म का मॉडल अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्पद साबित हो रहा है।
