मुंबई | देश के सबसे बड़े निजी ऋणदाता HDFC बैंक ने कॉर्पोरेट गवर्नेंस के मानकों को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। बैंक के बोर्ड ने पूर्व अंशकालिक चेयरमैन और स्वतंत्र निदेशक, अतानु चक्रवर्ती के अचानक इस्तीफे की विस्तृत समीक्षा के लिए घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर की बाहरी लॉ फर्मों को नियुक्त करने की मंजूरी दे दी है। 23 मार्च को हुई बोर्ड बैठक में यह निर्णय लिया गया कि बाहरी विशेषज्ञ एक निश्चित समय सीमा के भीतर इस्तीफे की विषयवस्तु की गहन जांच कर अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे। बैंक ने इस कदम को “प्रोएक्टिव” (सक्रिय) करार दिया है, ताकि किसी भी प्रकार की शंका को दूर कर पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।
अतानु चक्रवर्ती ने 18 मार्च को अपने पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा देते हुए पत्र में उल्लेख किया था कि पिछले दो वर्षों के घटनाक्रम उनके व्यक्तिगत मूल्यों और नैतिकता के अनुरूप नहीं थे। हालांकि, बैंक ने स्पष्ट किया है कि चक्रवर्ती ने किसी विशिष्ट गलत कार्य या वित्तीय गड़बड़ी का आरोप नहीं लगाया है, बल्कि यह विचारधारा और कार्य संस्कृति के अंतर का मामला प्रतीत होता है। चक्रवर्ती के जाने के बाद, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने केकी मिस्त्री को तीन महीने के लिए अंतरिम अंशकालिक चेयरमैन नियुक्त करने की मंजूरी दे दी है। मिस्त्री ने बैंक की स्थिरता पर पूर्ण भरोसा जताते हुए निवेशकों को आश्वस्त किया है कि बैंक के सामने फिलहाल कोई बड़ी चिंता का विषय नहीं है।
इस्तीफे की खबर के बाद 18 से 23 मार्च के बीच HDFC बैंक के शेयरों में लगभग 11.73% की भारी गिरावट दर्ज की गई थी, जिससे निवेशकों में बेचैनी देखी गई। लेकिन बोर्ड द्वारा बाहरी जांच के आदेश और पारदर्शिता के प्रति प्रतिबद्धता दिखाने के बाद मंगलवार को बाजार में सकारात्मक सुधार देखा गया। सुबह के कारोबार में BSE पर बैंक का शेयर 3% से अधिक की तेजी के साथ 767.75 रुपये पर पहुँच गया। यह मामला ऐसे समय में भी महत्वपूर्ण है जब बैंक अपने दुबई ऑपरेशंस के माध्यम से AT1 बॉन्ड की कथित गलत बिक्री की आंतरिक जांच पहले से ही कर रहा है, जिसमें हाल ही में तीन वरिष्ठ अधिकारियों पर गाज गिरी थी।

