जबलपुर:मप्र हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा व जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने मध्य प्रदेश में डायल-112 के ठेके के विरुद्ध दायर याचिका में हस्तक्षेप से इंकार करते हुए उसे निरस्त कर दिया। युगलपीठ ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि इस ठेके में कोई तथ्यात्मक गड़बड़ी नहीं है। न्यायालय के उक्त आदेश से सरकार को बड़ी राहत मिली है।दरअसल राज्य शासन ने मप्र पुलिस टेलीकम्युनिकेशन हेडक्वार्टर द्वारा सिकंदराबाद की कंपनी को 972 करोड़ रूपये का ठेका आवंटित किया था। मप्र में 10 साल तक अत्यावश्यक सेवा का संचालन करने वाली बीवीजी इंडिया लिमिटेड पुणे की कंपनी ने उक्त ठेके को चुनौती दी थी।
याचिका में कहा गया कि तेलंगाना की कंपनी ईएमआरआई ग्रीन्स को पांच वर्ष के लिए ठेका दिया गया है। डायल 112 के सिस्टम इंटीग्रेटर फेस-टू के चयन को लेकर नया टेंडर 12 मार्च 2025 को जारी किया गया। इस प्रक्रिया में ईएमआरआई ग्रीन हेल्थ सर्विस सिकंदराबाद तेलंगाना को सफल मानकर टेंडर जारी कर दिया गया। याचिकाकर्ता कंपनी का आरोप था कि सिकंदराबाद की कंपनी ने टेंडर में फर्जी दस्तावेज लगाए हैं, इसलिए उसको अयोग्य घोषित होना चाहिए। मामले पर हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से उपमहाधिवक्ता अभिजीत अवस्थी हाजिर हुए। जिन्होंने दलील दी कि सिकंदराबाद की कंपनी के पक्ष में टेंडर का निष्पादन हो चुका है। मामले पर 17 अक्टूबर को हुई सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने अपना आदेश सुरक्षित रख लिए था, जो सोमवार को सुनाया गया।
