वर्तमान भंडारण क्षमता भविष्य की जरूरतों के लिए अपर्याप्त: रिपोर्ट

नयी दिल्ली, 22 मार्च (वार्ता) पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री की जारी एक नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, देश का खाद्यान्न उत्पादन नई ऊंचाइयां छूने की राह पर है लेकिन खाद्यान्न की वर्तमान भंडारण क्षमता, भविष्य की जरूरतों के लिए अपर्याप्त हैं।

‘भारत में खाद्यान्न भंडारण बाज़ार 2025-2030’ शीर्षक वाली इस रिपोर्ट में कृषि क्षेत्र की इस प्रगति को संभालने के लिए बुनियादी ढांचे में आमूल-चूल बदलाव की आवश्यकता पर बल दिया गया है।

गौरतलब है कि सरकारी आंकड़ों के अनुसार देश का वर्तमान खाद्यान्न उत्पादन (2024-25) 35.77 करोड़ टन है। पीएचडी चैंबर की इस रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2030-31 तक इसके बढ़कर 36.80 करोड़ टन होने का अनुमान है।

रिपोर्ट में आगाह किया गया है कि इन आंकड़ों से पता चला है कि जहाँ पैदावार का स्तर लगातार बढ़ रहा है, वहीं वर्तमान भंडारण क्षमता भविष्य की जरूरतों के हिसाब से काफी नहीं हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भंडारण प्रणालियों में समय रहते सुधार नहीं किया गया, तो उपज का एक बड़ा हिस्सा कटाई के बाद खराब हो सकता है, जिससे खाद्य सुरक्षा और किसानों की आय, दोनों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

पीएचडी चैंबर के अध्यक्ष राजीव जुनेजा ने कहा कि देश को एक कुशल कृषि मूल्य श्रृंखला की ओर ले जाने के लिए प्रौद्योगिकी-संचालित बुनियादी ढांचा अनिवार्य है। रिपोर्ट में साइलो-आधारित आधुनिक भंडारण प्रणालियों को अपनाने का सुझाव दिया गया है। साइलो प्रणाली अनाज की बर्बादी को कम करने और अनाज की गुणवत्ता बनाए रखने में सक्षम हैं। उद्योग निकाय ने सरकार से एक ऐसी नीति बनाने की मांग की है जो इस क्षेत्र में निजी और संस्थागत निवेश को प्रोत्साहित कर सके।

रिपोर्ट के अनुसार, वैज्ञानिक भंडारण विधियों को अपनाने से न केवल घरेलू मांग पूरी होगी, बल्कि वैश्विक कृषि व्यापार में भी भारत की स्थिति मजबूत होगी। इसके अलावा, आधुनिक गोदामों के निर्माण से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और किसानों को उनकी पैदावार का बेहतर मूल्य मिल सकेगा।

रिपोर्ट कहती है कि दीर्घकालिक खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी और आसान वित्तपोषण की व्यवस्था करनी होगी। इससे मदद से भंडारण के अंतर को पाटना अब अत्यंत महत्वपूर्ण हो गया है।

 

 

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