छतरपुर में मार्च में ही मई-जून जैसी तपिश

छतरपुर: बुंदेलखंड के छतरपुर जिले में इस वर्ष मौसम के बदले मिजाज ने किसानों के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। मार्च के महीने में ही पारा इतना चढ़ गया है कि लोगों को मई-जून जैसी चुभती गर्मी का अहसास होने लगा है। इस बेतहाशा बढ़ती तपिश का सीधा असर रबी की फसलों पर पड़ा है, जिससे गेहूं की फसल अपनी निर्धारित अवधि से लगभग 20 दिन पहले ही पककर तैयार हो गई है।
समय से पहले कटाई की मजबूरी
जिले में इस बार फसल की पैदावार तो अच्छी हुई है, लेकिन अचानक बढ़ी गर्मी ने गेहूं को समय से पहले पका दिया है। किसान अब मजबूरन खेतों में उतरकर ‘सोने’ जैसी सुनहरी गेहूं की फसल की कटाई में जुट गए हैं। मटर और चना जैसी फसलें पहले ही कट चुकी हैं, लेकिन अब मुख्य ध्यान गेहूं को सुरक्षित घर लाने पर है। किसान हार्वेस्टर और थ्रेसिंग मशीनों के जरिए चौबीसों घंटे काम कर रहे हैं ताकि फसल को जल्द से जल्द सुरक्षित किया जा सके।
कृषि विभाग और वैज्ञानिकों की सलाह
मौसम की अनिश्चितता को देखते हुए कृषि विभाग ने भी किसानों को अलर्ट मोड पर रहने की सलाह दी है। नौगांव स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के अधिकारी राजीव सिंह ने किसानों को सचेत करते हुए कहा है— “आने वाले दिनों में हल्की बारिश और बूंदाबांदी की संभावना बनी हुई है। किसान भाई जल्द से जल्द अपनी फसल काटकर उसे सुरक्षित स्थान पर रखें ताकि किसी भी प्रकार के नुकसान से बचा जा सके।

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