निर्देशक मोहित सूरी ने 8 घंटे की शिफ्ट को लेकर अपनी राय दी। उन्होंने कहा कि फिल्ममेकिंग में समय तय करना मुश्किल है, लेकिन क्रू के लिए सीमित शिफ्ट जरूरी हो सकती है।
बॉलीवुड में इन दिनों 8 घंटे की शिफ्ट को लेकर बहस तेज हो गई है। कई सितारों और फिल्ममेकर्स के बयान सामने आ चुके हैं। अब इस मुद्दे पर निर्देशक मोहित सूरी ने अपनी राय रखी है। उन्होंने कहा कि फिल्म इंडस्ट्री में काम को तय समय में बांधना आसान नहीं है, क्योंकि यह एक क्रिएटिव फील्ड है। उनके मुताबिक, एक्टिंग को 9 से 5 की नौकरी की तरह नहीं देखा जा सकता।
मोहित सूरी ने अपनी फिल्म आवारापन का उदाहरण देते हुए बताया कि शूटिंग के दौरान कई बार परिस्थितियां ऐसी बनती हैं, जहां लंबी शिफ्ट करनी पड़ती है। उन्होंने कहा कि अभिनेता इमरान हाशमी ने एक बार लगातार 24 घंटे तक शूटिंग की थी, क्योंकि लोकेशन सिर्फ एक दिन के लिए उपलब्ध थी। ऐसे में टीम को समय का पूरा उपयोग करना जरूरी था।
8 घंटे की शिफ्ट को भी बताया जरूरी
हालांकि, मोहित सूरी ने 8 घंटे की शिफ्ट को पूरी तरह गलत नहीं ठहराया। उन्होंने माना कि 12 घंटे की शूटिंग अक्सर 14-15 घंटे तक खिंच जाती है, जिसमें ट्रैवल, मेकअप और तकनीकी तैयारियां शामिल होती हैं। ऐसे में सीमित शिफ्ट की मांग सिर्फ स्टार्स ही नहीं, बल्कि पूरी क्रू के हित में हो सकती है। निर्देशक ने इस बात पर जोर दिया कि लाइटमैन, स्पॉट बॉय, ड्राइवर और अन्य तकनीकी स्टाफ के लिए भी लंबे वर्किंग आवर्स थकान और स्वास्थ्य पर असर डालते हैं। ऐसे में 8 घंटे की शिफ्ट एक व्यावहारिक समाधान हो सकता है, जिससे काम की गुणवत्ता और टीम का संतुलन दोनों बनाए रखा जा सके।
दीपिका पादुकोण की मांग से शुरू हुई बहस
गौरतलब है कि यह विवाद तब सुर्खियों में आया, जब दीपिका पादुकोण के 8 घंटे काम करने की मांग की खबरें सामने आईं। इसके बाद से इंडस्ट्री में वर्क कल्चर, काम के घंटे और कलाकारों के अधिकारों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। मोहित सूरी का यह बयान इस बहस को एक संतुलित नजरिया देता है, जहां एक ओर फिल्ममेकिंग की चुनौतियां हैं, तो दूसरी ओर कलाकारों और क्रू की भलाई भी जरूरी है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि बॉलीवुड इस मुद्दे पर किस दिशा में आगे बढ़ता है।
