गुना:मानवीय संवेदना और त्वरित कार्रवाई का परिचय देते हुए गुना पुलिस ने रेलवे स्टेशन पर लावारिस मिली 7 वर्षीय मासूम को महज 24 घंटे के भीतर उसके परिजनों से मिलाकर सराहनीय कार्य किया है। पुलिस अधीक्षक अंकित सोनी के निर्देशन में टीम ने उत्तर प्रदेश के प्रयागराज तक सुराग जोड़ते हुए बच्ची को सुरक्षित उसके परिवार तक पहुंचाया।घटना 19 मार्च की सुबह की है, जब गुना रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ को एक डरी-सहमी बच्ची अकेली मिली।
प्रारंभिक जानकारी में सामने आया कि बच्ची अपनी मां के साथ आई थी, लेकिन मां की मानसिक स्थिति ठीक न होने के कारण वह उसे स्टेशन पर छोड़कर ट्रेन में सवार होकर चली गई। सूचना मिलते ही विशेष किशोर पुलिस इकाई और अन्य संबंधित एजेंसियों को सक्रिय किया गया।प्रभारी अनिल सिंह तोमर के नेतृत्व में टीम मौके पर पहुंची और बच्ची को संरक्षण में लिया। शुरुआत में बच्ची इतनी भयभीत थी कि अपना पता स्पष्ट नहीं बता पा रही थी। पुलिस ने तकनीकी संसाधनों और संवेदनशील पूछताछ के माध्यम से जानकारी जुटाई। बातचीत के दौरान बच्ची ने ‘काली माता चौराहा’ का जिक्र किया, जिसके आधार पर पुलिस ने विभिन्न शहरों में जांच की और आखिरकार सुराग प्रयागराज से जुड़ा।
प्रयागराज पुलिस से समन्वय के बाद परिजनों की पहचान हुई, जहां परिवार द्वारा बच्ची और उसकी मां की गुमशुदगी दर्ज कराई गई थी। सूचना मिलने पर बच्ची के पिता गुना पहुंचे। जैसे ही उन्होंने अपनी बेटी को देखा, भावुक होकर उसे गले लगा लिया। यह दृश्य वहां मौजूद सभी लोगों को भावुक कर गया।बेटी के सुरक्षित मिलने पर परिजनों ने गुना पुलिस का आभार व्यक्त किया और पुलिस की त्वरित कार्रवाई की सराहना की।पुलिस अधीक्षक ने इस पूरे मामले पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि एक मासूम को सुरक्षित उसके परिवार से मिलाना पुलिस के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने इसे मानवीय कर्तव्य बताते हुए कहा कि ऐसे कार्य ही पुलिस की वास्तविक पहचान को मजबूत करते हैं।
