अमेरिका को भारी नुकसान! स्विट्जरलैंड ने बंद किए हथियारों के दरवाजे, 119 मिलियन डॉलर के निर्यात पर मंडराया खतरा

ईरान युद्ध के चलते स्विट्जरलैंड ने अमेरिका को गोला-बारूद देने से मना कर दिया है। इसके साथ ही अपने हवाई क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य उड़ानों पर भी सख्ती बढ़ा दी है।

मध्य-पूर्व में जारी भीषण युद्ध के बीच अमेरिका को यूरोप से एक बड़ा कूटनीतिक और सामरिक झटका लगा है। अपनी निष्पक्षता के लिए प्रसिद्ध देश स्विट्जरलैंड ने अमेरिका को हथियार और गोला-बारूद के नए निर्यात पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। स्विस सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह किसी भी ऐसे राष्ट्र को सैन्य सामग्री की आपूर्ति नहीं कर सकता जो वर्तमान में किसी अंतरराष्ट्रीय युद्ध में सीधे तौर पर शामिल हो।

तटस्थता नीति का हवाला
स्विट्जरलैंड की सरकार ने इस फैसले के पीछे अपनी सदियों पुरानी ‘तटस्थता की नीति’ को मुख्य आधार बताया है। आधिकारिक बयान के अनुसार, 28 फरवरी से मिडिल ईस्ट में संघर्ष बढ़ने के बाद से अमेरिका के लिए कोई भी नया हथियार लाइसेंस जारी नहीं किया गया है। स्विट्जरलैंड के कड़े नियमों के तहत, युद्धरत देशों को हथियार बेचना प्रतिबंधित है। इसके साथ ही, स्विट्जरलैंड ने अपने हवाई क्षेत्र के इस्तेमाल पर भी सख्ती बढ़ा दी है। अब केवल उन्हीं अमेरिकी सैन्य उड़ानों को अनुमति दी जा रही है जिनका ईरान युद्ध से कोई संबंध नहीं है।

स्विस हथियारों का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार
यह प्रतिबंध अमेरिकी रक्षा जरूरतों के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है क्योंकि पिछले साल ही अमेरिका, स्विट्जरलैंड से हथियार खरीदने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश बनकर उभरा था। स्विट्जरलैंड के कुल हथियार निर्यात का लगभग 10% हिस्सा (करीब 119 मिलियन डॉलर) अकेले अमेरिका को गया था जिसमें छोटे हथियार, गोला-बारूद और हवाई वाहन शामिल थे। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि जिन पुराने लाइसेंसों का युद्ध से सीधा संबंध नहीं है, वे जारी रहेंगे, लेकिन एक विशेष टीम समय-समय पर इनकी समीक्षा करेगी।

स्विस डिफेंस इंडस्ट्री पर बढ़ेगा दबाव
स्विट्जरलैंड का यह फैसला उसकी अपनी डिफेंस इंडस्ट्री के लिए भी चिंता का विषय बन सकता है। इससे पहले यूक्रेन युद्ध के समय भी स्विट्जरलैंड ने अपने सहयोगियों को स्विस-निर्मित हथियार भेजने से रोक दिया था जिससे कई कंपनियों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा था।

स्थिति को संभालने के लिए कानून में ढील देने का एक प्रस्ताव लाया गया था ताकि अमेरिका सहित 25 पश्चिमी देशों को युद्ध के समय भी हथियार दिए जा सकें लेकिन यह कानून अभी लागू नहीं हुआ है और इस पर अप्रैल में जनमत संग्रह होने की संभावना है।

ईरान युद्ध का वैश्विक प्रभाव
गौरतलब है कि ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी इस जंग का असर केवल हथियारों की सप्लाई तक सीमित नहीं है। इस युद्ध के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव बढ़ गया है, जिससे भारत सहित दुनिया भर में प्रीमियम पेट्रोल की कीमतें महंगी हो गई हैं और वैश्विक बाजारों पर मंदी का खतरा मंडरा रहा है। ईरान द्वारा ऊर्जा ठिकानों और रिफाइनरियों को निशाना बनाए जाने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल और गैस की आपूर्ति बाधित होने की आशंका गहरा गई है।

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