रादुविवि : दागी और आपराधिक प्रवृति के कर्मचारी भी चुनाव मैदान में

जबलपुर: रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में आगामी चल रहे कर्मचारी संघ के चुनाव में कुछ ऐसे भी कर्मचारी हैं, जिनके ऊपर अपराधिक प्रकरण दर्ज है और वह कई बार विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से निलंबित हो चुके हैं। कहा जाए तो दागी और आपराधिक प्रवृत्ति के कर्मचारी भी चुनाव में अपनी दावेदारी कर रहे हैं, जिसमें कर्मचारी संजय यादव का पहला नाम है जो अध्यक्ष पद पर प्रत्याशी है। इन पर निलंबित होने का दाग लगा हुआ है, साथ ही उच्च शिक्षा विभाग की जांच रिपोर्ट के अनुसार वह अपराधिक प्रकरण दर्ज है।

उल्लेखनीय है कि रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में आगामी 25 मार्च को कर्मचारी संघ का चुनाव होने वाला है। बुधवार को नाम वापसी के बाद चुनाव में प्रत्याशियों की स्थिति पूरी तरह से साफ हो गई है। जिसमें कर्मचारी संघ अध्यक्ष के लिए तीन दावेदार मैदान में उतर चुके हैं। इनमें प्रेम प्रकाश पुरोहित, संजय यादव और वीरेंद्र सिंह पटेल शामिल हैं। वहीं इसके अलावा बाकी पदों के लिए भी त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल रहा है।
निलंबन की हो चुकी है कार्यवाही
गौरतलब है कि कर्मचारी संजय यादव के खिलाफ पूर्व में कुलगुरु के साथ अभद्र व्यवहार के मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए उसे तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था। जारी आदेश में बताया गया था कि संजय यादव द्वारा किया गया कृत्य आचरण नियमों के विरुद्ध है। निलंबन अवधि में उसका मुख्यालय व्यंकटेश लाइब्रेरी (विश्वविद्यालय अध्ययन केन्द्र), कटनी था, लेकिन स्टे ऑडर लेने के बाद कर्मचारी अब भी विश्वविद्यालय में कार्यरत है। देखा जाए तो ऐसे कर्मचारी अगर विवि में अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ रहे हैं तो विश्वविद्यालय में आगे की स्थिति क्या होगी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।
पहले से विवादों में रहा है कर्मचारी
सूत्रों के अनुसार संजय यादव पूर्व में भी तत्कालीन कुलपति के साथ अभद्रता के मामले में निलंबित हो चुका है। जिसमें कर्मचारी संजय यादव द्वारा पुराने कुलपति की गाड़ी को टक्कर मारी गई थी, जिसके बाद तत्काल रूप से संजय यादव को सस्पेंड किया गया था। उस पर पहले भी गंभीर आरोप लग चुके हैं।
अनियमितताओं की जांच दायरे में है संजय यादव
विदित है कि संजय यादव पूर्व में लेखा शाखा में पदस्थ था, लेकिन अनियमितताओं की शिकायत के बाद उसे वहां से हटा दिया गया था। उसकी भूमिका की जांच के लिए पहले से ही एक समिति गठित है।
विश्वविद्यालय में उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर संजय यादव पर पुलिस में आपराधिक प्रकरण दर्ज है। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार जांच टीम ने विश्वविद्यालय में अपराधिक प्रकरण दर्ज वाले लोगों को हटाने के लिए आदेशित किया था, उसके बावजूद भी वह विश्वविद्यालय में कार्यरत रहा।

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