बिना प्रमाण बहुविवाह की परंपरा को नहीं दी जा सकती मान्यता: हाईकोर्ट

जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट के जस्टिस विवेक जैन की एकलपीठ ने अपने एक अहम आदेश में स्पष्ट किया है कि बिना प्रमाण के किसी समाज में बहुविवाह की परंपरा को मान्यता नहीं दी जा सकती। केवल आदिवासी परंपरा का हवाला देकर किसी महिला को पति की संपत्ति या नौकरी में अधिकार नहीं मिल सकता। न्यायालय ने कहा कि ऐसे दावे के लिए ठोस साक्ष्य जरूरी हैं। उक्त मत के साथ न्यायालय ने शहडोल निवासी महिला की याचिका निरस्त कर दी।

दरअसल शहडोल निवासी मुन्नी बाई की ओर से दायर मामले में कहा गया था कि वह भगत सिंह की दूसरी पत्नी है। वे पाव जनजाति से हैं। पाव जनजाति में बहुविवाह की परंपरा है। इसलिए उन पर हिंदू विवाह अधिनियम लागू नहीं होता। उसने पति की मृत्यु के बाद पति की संपत्ति में हिस्सा और नौकरी से जुड़े लाभ देने की मांग की। मृतक की पहली पत्नी फूलमती की ओर से इसका विरोध किया गया। तर्क दिया गया कि फूलमती मृतक की अकेली वैध पत्नी है। सरकारी सेवा अभिलेख में भी पत्नी के रूप में उसी का नाम दर्ज है। सुनवाई के बाद न्यायालय ने पाया कि याचिकाकर्ता की ओर से कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया गया। कोई मान्य दस्तावेज, परंपरा का प्रमाण या पूर्व न्यायिक निर्णय भी नहीं बताया गया। सुनवाई के बाद न्यायालय ने दायर याचिका याचिका निरस्त कर दी।

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