
सीहोर। जिले में बीती रात अचानक बदले मौसम ने किसानों और व्यापारियों की चिंता बढ़ा दी. करीब 45 मिनट तक रुक-रुक कर हुई तेज बेमौसम बारिश ने जहां कृषि उपज मंडी समिति में खुले में रखे गेहूं को भिगो दिया. वहीं खेतों में सूखने को पड़ी उपज और खड़ी फसल भी प्रभावित हुई. मंडी परिसर में कई दुकानों के सामने रखा अनाज पानी में भीग गया, जिससे उसकी गुणवत्ता पर असर पडऩे की आशंका जताई जा रही है.
क्षेत्र में इन दिनों फसल कटाई का कार्य जोरशोर से चल रहा है. ऐसे में मौसम के मिजाज बिगडऩे से किसान चिंतित हो गए हैं. बीती देर रात लगभग 1.45 बजे बादलों की जोरदार गडग़ड़ाहट और बिजली की चकाचौंध के बीच बारिश का सिलसिला शुरू हुआ. लगभग 20 मिनट तक बारिश होने से खेतों में सूख रही उपज गीली हो गई तो पककर कटने को तैयार फसल पर भी पानी का असर पडऩे की संभावना बलवती हो गई है. मौसम विभाग के अनुसार, यह बारिश बीती रात करीब 1.45 बजे शुरू हुई और लगभग डेढ़ घंटे तक रुक-रुक कर जारी रही. इससे पहले 21 फरवरी को भी जिले के कुछ इलाकों में हल्की बारिश दर्ज की गई थी, जिसमें श्यामपुर में 1.3 मिमी, आष्टा में 4 मिमी और जावर में 3 मिमी वर्षा हुई थी। करीब एक महीने बाद 20 मार्च को फिर से बारिश होने से मौसम का मिजाज अचानक बदल गया. हालांकि इस बारिश से आम लोगों को भीषण गर्मी से थोड़ी राहत जरूर मिली है. पिछले 24 घंटे में अधिकतम तापमान 38 डिग्री तक पहुंच गया था. बारिश के बाद तापमान में गिरावट दर्ज की गई, जिले में दर्ज वर्षा के आंकड़ों के अनुसार, सीहोर में 2.2 मिमी और इछावर में 9 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई. लेकिन यह राहत किसानों और व्यापारियों के लिए महंगी साबित हो रही है, क्योंकि फसल और अनाज को हुए नुकसान की भरपाई करना आसान नहीं होगा.
उपज को सहेजने की कवायद में जुटे किसान
सुबह होते ही मंडी में व्यापारी और किसान भीगे गेहूं को बचाने में जुट गए. कहीं तिरपाल डाले गए तो कहीं धूप निकलते ही अनाज को फैलाकर सुखाने का काम शुरू कर दिया गया. कई स्थानों पर गेहूं की बोरियां खोलकर उन्हें सुखाया जा रहा है, ताकि नुकसान को कम किया जा सके. बावजूद इसके, व्यापारियों का कहना है कि भीगने के कारण गेहूं की चमक और गुणवत्ता प्रभावित होगी, जिससे बाजार में इसके दाम भी घट सकते हैं. केवल मंडी ही नहीं, खेतों में खड़ी फसल पर भी इस बारिश का असर पड़ा है. किसानों के अनुसार कटाई के लिए तैयार गेहूं की फसल की चमक और दाने की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है. इसके अलावा लहसुन और प्याज की फसलों को भी नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है, क्योंकि ये फसलें इस समय संवेदनशील अवस्था में हैं.
