
जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट में शनिवार को 10 विशेष पीठों के माध्यम से लंबित आपराधिक प्रकरणों का बोझ कम करने की दिशा में ठोस प्रयास का शुभारंभ किया गया। इस प्रक्रिया में तीन हजार से अधिक लंबित जमानत अर्जियों सहित अन्य प्रकरणों को निराकरण करने पर जोर है।
हाईकोर्ट बार एसोसिएशन जबलपुर के अध्यक्ष धन्य कुमार जैन व सचिव परितोष त्रिवेदी ने बताया कि शनिवार को सुबह से शाम तक आपराधिक मामलों की सुनवाई का दौर चला। इस दौरान संबंधित प्रकरणों के वकील मौजूद रहे। पक्षकारों में इस बात की खुशी देखने को मिली कि उनके लंबित मामले अब निराकृत कर दिए जाएंगे। उल्लेखनीय है कि इसके लिये हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा द्वारा दस विशेष पीठों का गठन किया गया है। जिनमें जस्टिस अचल कुमार पालीवाल, जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल, जस्टिस देवनारायण मिश्रा, जस्टिस दीपक खोत, जस्टिस अजय कुमार निरंकारी, जस्टिस हिमांशु जोशी, जस्टिस रामकुमार चौबे, जस्टिस रत्नेश चंद्र सिंह बिसेन, जस्टिस बीपी शर्मा और जस्टिस प्रदीप मित्तल शामिल थे।
एक वर्ष में 50 हजार केस निपटाने का लक्ष्य-
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में चार लाख 82 हजार 627 केस लंबित हैं। इसमें 2,86,172 मामले सिविल और 1,96,455 क्रिमिनल के हैं। कुल क्रिमिनल मामलों में शून्य से 10 साल पुराने 1,34,524 केस, 11 से 25 साल पुराने 59,424 केस और 25 साल से भी ज्यादा पुराने केसों की संख्या 2,507 हैं। हाईकोर्ट की मुख्य पीठ जबलपुर में करीब तीन हजार मामले अकेले जमानत अर्जियों से जुड़े हैं, जो महीनों से लंबित हैं। भोपाल, इंदौर और ग्वालियर की तीनों पीठों में कुल 53 न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या है, लेकिन केवल 43 जज कार्यरत हैं। अनुमान है कि 10 जजों की स्पेशल बेंच एक साल में 30 से 50 हजार से अधिक मामलों का निपटारा कर सकती है। सभी बेंचें एमसीआरसी यानी क्रिमिनल मामलों (आदेश, एडमिशन और अंतिम सुनवाई) की सुनवाई करेंगी।
