नयी दिल्ली, 19 मार्च (वार्ता) इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) के 39वें स्थापना दिवस समारोह की भव्य शुरुआत गुरुवार को तीन महत्वपूर्ण प्रदर्शनियों के उद्घाटन के साथ हुई। इसे तीन दिवसीय उत्सव (19 से 21 मार्च तक) में भारत की समृद्ध कला और सांस्कृतिक विरासत को एक मंच पर प्रस्तुत किया जा रहा है।
समारोह का उद्घाटन आईजीएनसीए ट्रस्ट के अध्यक्ष रामबहादुर राय, सदस्य सचिव सच्चिदानंद जोशी और अन्य ट्रस्ट सदस्यों द्वारा किया गया। कार्यक्रम में प्रसिद्ध गीतकार प्रसून जोशी भी मौजूद रहे। इससे पहले ट्रस्ट के सदस्यों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की, जहां प्रधानमंत्री ने ‘युगे युगीन भारत संग्रहालय’ का जिक्र करते हुए संस्कृति के महत्व पर बल दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत को समझने के लिए इतिहास-बोध जरूरी है और आईजीएनसीए जैसे संस्थान इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जो स्थान पहले सत्ता का केंद्र थे, वे अब संस्कृति के केंद्र बनते जा रहे हैं।
इस अवसर पर ‘कलातत्त्वकोश’ पुस्तक श्रृंखला के आठवें खंड का लोकार्पण भी किया गया। विशेषज्ञों ने इसे भारतीय कला और ज्ञान परंपरा का महत्वपूर्ण दस्तावेज बताया।
समारोह के तहत आयोजित प्रदर्शनियों में “कलादृष्टि: ए डिकेड ऑफ विजन” प्रमुख आकर्षण रही, जिसमें 2016 से 2026 तक आईजीएनसीए की यात्रा को तस्वीरों के माध्यम से दर्शाया गया है। इसके अलावा आंध्र प्रदेश की पारंपरिक कठपुतली कला पर आधारित “ब्रीदिंग हाइड्स” और राजस्थान की प्रसिद्ध थेवा कला पर आधारित प्रदर्शनी भी दर्शकों को आकर्षित कर रही हैं।
कार्यक्रम के पहले दिन प्रख्यात नृत्यांगना सोनल मानसिंह ने “नाट्य कथा – देवी” की प्रस्तुति दी। दूसरे दिन पद्म सुब्रमण्यम द्वारा “भगवद गीता” पर आधारित नृत्य-नाट्य प्रस्तुत किया जाएगा। वहीं तीसरे दिन विभिन्न राज्यों की लोक नृत्य और मार्शल आर्ट प्रस्तुतियां होंगी, जिनमें असम का बागुरुम्बा, हिमाचल का नाटी, गुजरात का तलवार रास और केरल का कलारीपयट्टु शामिल हैं।
यह आयोजन भारतीय संस्कृति के संरक्षण, संवर्धन और प्रसार के प्रति आईजीएनसीए की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। साथ ही यह मंच परंपरा और आधुनिकता के समन्वय को भी उजागर करता है, जो ‘विकसित भारत’ की सांस्कृतिक नींव को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
