
जबलपुर। हाईकोर्ट में एक याचिका के जरिए मध्य प्रदेश के महाधिवक्ता कार्यालय में शासकीय अधिवक्ताओं की नियुक्ति को चुनौती देने के मामले में बुधवार को सुनवाई हुई। हाईकोर्ट ने शासन और एजी ऑफिस को मामले में जवाब पेश करने अंतिम मोहलत दी है। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा व जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने मामले पर अगली सुनवाई 27 अप्रैल को नियत की है।
दरअसल हाईकोर्ट बार एसोसिएशन जबलपुर के संयुक्त सचिव योगेश सोनी ने याचिका में आरोप लगाया है कि महाधिवक्ता कार्यालय में नियम विरुद्ध तरीके से अर्हता विहीन वकीलों को शासकीय वकील बना दिया गया है। महाधिवक्ता कार्यालय में कुल 157 ला आफिसर्स की नियुक्ति को लेकर 25 दिसंबर को सूची जारी की गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि नियुक्ति प्रक्रिया पूरी तरह मनमानी और पक्षपातपूर्ण है। सूची में पारदर्शिता का अभाव है। अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने दलील दी कि विधि अधिकारियों का कार्यकाल एक वर्ष का है और अभी तक मामले में जवाब नहीं आया है। याचिका में कहा गया है कि वर्ष 2013 की राजपत्र अधिसूचना में सरकारी वकीलों की नियुक्ति के लिए स्पष्ट और निर्धारित प्रक्रिया तय की गई है, लेकिन महाधिवक्ता कार्यालय ने उसका स्पष्ट उल्लंघन किया। अधिसूचना में कहा गया था कि सरकारी अधिवक्ता की नियुक्ति के लिए न्यूनतम 10 वर्ष की प्रेक्टिस की योग्यता निर्धारित है। इसके उलट कई शासकीय अधिवक्ता ऐसे हैं जिनकी प्रेक्टिस 10 साल से बहुत कम है।
