युद्धग्रस्त ईरान से निकल रहे 200 भारतीय छात्र अजरबैजान बॉर्डर पर फंसे, एग्जिट कोड न मिलने से छूटी फ्लाइट्स, हाड़ कपाने वाली ठंड में विदेश मंत्रालय से मदद की गुहार

श्रीनगर | इजराइल और अमेरिका के हवाई हमलों के बीच ईरान में पढ़ रहे भारतीय छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है। तेहरान और अन्य मेडिकल यूनिवर्सिटीज के 200 से अधिक छात्र इस वक्त ईरान-अजरबैजान के ‘अस्तारा लैंड बॉर्डर’ पर फंसे हुए हैं। छात्रों का आरोप है कि अजरबैजान के सुरक्षा अधिकारी उनसे 16-डिजिट का ‘एग्जिट कोड’ मांग रहे हैं, जो उनके पास नहीं है। भारतीय दूतावास और स्थानीय अधिकारियों के बीच समन्वय की कमी के कारण 15 मार्च से कई छात्रों की निर्धारित फ्लाइट्स छूट चुकी हैं। युद्ध के बीच अपनी जान बचाकर निकले ये छात्र अब कड़ाके की ठंड और संसाधनों की कमी के कारण बीमार पड़ रहे हैं।

श्रीनगर सहित देश के विभिन्न हिस्सों में रह रहे छात्रों के माता-पिता बेहद चिंतित हैं। अभिभावकों का कहना है कि उन्होंने भारी भरकम रकम (लगभग 60,000 रुपये) खर्च कर एयरस्पेस बंद होने के बाद अजरबैजान के रास्ते टिकट बुक किए थे, जो अब बेकार हो रहे हैं। परिजनों के अनुसार, कई छात्र 13 मार्च से ही चेकपॉइंट पर खुले आसमान के नीचे इंतजार कर रहे हैं। नसीमा बानो जैसी कई माताओं ने सरकार से अपील की है कि उनके बच्चों को तुरंत वहां से निकाला जाए, क्योंकि छात्रों को अब पैनिक अटैक आ रहे हैं और ठंड की वजह से उनकी तबीयत बिगड़ रही है।

ऑल इंडिया मेडिकल स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AIMA) के अनुसार, पिछले साल के ‘ऑपरेशन सिंधु’ के विपरीत, इस बार छात्रों को अपने खर्च पर बॉर्डर तक पहुँचने और फ्लाइट लेने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि दूतावास ने 90 नागरिकों की मदद की है, लेकिन ग्राउंड जीरो पर स्थिति अभी भी तनावपूर्ण है। जमीनी हकीकत यह है कि बॉर्डर अथॉरिटीज बिना विशेष कोड के प्रवेश नहीं दे रही हैं। जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन ने विदेश मंत्रालय से व्यक्तिगत हस्तक्षेप की मांग की है ताकि फंसे हुए 200 छात्रों के लिए अजरबैजान के समकक्षों के साथ मिलकर रास्ता साफ किया जा सके।

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