इंदौर: देवी अहिल्याबाई होलकर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट की करीब 1.25 लाख वर्गफीट की करोड़ों की जमीन पर कथित कब्जे का मामला सामने आने से हड़कंप मच गया है. जमीन पर प्लॉटिंग का खेल भी किया गया है, जिसके बाद एयरपोर्ट प्रबंधन ने जांच शुरू कर दी है. पूरे मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए सीमांकन, सर्वे और फेंसिंग की तैयारी के साथ सुरक्षा भी बढ़ा दी गई है.
एडवोकेट प्रमोद द्विवेदी ने एयरपोर्ट अथॉरिटी को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि पुराने टर्मिनल भवन के सामने स्थित करीब 1.25 लाख वर्गफीट जमीन पर अतिक्रमण किया गया है. द्विवेदी के अनुसार, इस जमीन को पहले कंपाउंड वॉल से घेरा गया था और यह पंचशील नगर से चौरसिया नगर तक फैली हुई थी। उनका दावा है कि बाजार मूल्य के आधार पर इसकी कीमत करोड़ो रुपए हो सकती है. शिकायत में यह भी कहा गया है कि एक कॉलोनाइजर ने कथित रूप से एयरपोर्ट की जमीन को अपने प्लॉट में शामिल कर बेच दिया या किराये पर दे दिया.
एयरपोर्ट प्रबंधन का पक्ष- सीमांकन से होगी स्थिति स्पष्ट
मामले पर एयरपोर्ट अधिकारी रामस्वरूप यादव ने बताया कि संबंधित जमीन का जल्द सीमांकन कराया जाएगा. उन्होंने कहा कि सीमांकन के बाद एयरपोर्ट की भूमि पर फेंसिंग कर बोर्ड लगाए जाएंगे, ताकि वास्तविक सीमा स्पष्ट हो सके और किसी प्रकार का भ्रम न रहे. शासन को भी इस प्रक्रिया के लिए अवगत कराया जाएगा.
कुछ हिस्सों पर स्थिति स्पष्ट, बाकी का होगा सत्यापन
एयरपोर्ट प्रबंधन के अनुसार, कुछ क्षेत्र सीधे तौर पर एयरपोर्ट की भूमि में आते हैं, जबकि कुछ खाली जमीन पीछे की ओर स्थित है, जिसकी स्थिति स्पष्ट करने के लिए सीमांकन जरूरी है. साथ ही, एयरपोर्ट परिसर की टूटी हुई दीवारों को भी जल्द दुरुस्त किया जाएगा. जमीन विवाद को लेकर शिकायत और प्रबंधन के स्पष्टीकरण के बीच अब नजर सीमांकन और जांच प्रक्रिया पर है. आने वाले समय में प्रशासनिक कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि संबंधित जमीन की वास्तविक स्थिति क्या है.
