मार्च में ही सूखे हलक: सीहोर में पानी को लेकर बढ़ा तनाव, ड्यूटी पर तैनात नपाकर्मी को पीटा

सीहोर। शहर में गहराते जल संकट के बीच अब पानी को लेकर विवाद भी सामने आने लगे हैं. मार्च में ही जलस्त्रोतों के जवाब देने और गिरते भू-जल स्तर ने हालात चिंताजनक बना दिए हैं. नगर पालिका द्वारा पानी की सप्लाई दो दिन छोड़कर किए जाने से लोगों की परेशानी बढ़ गई है, जिसका असर अब सामाजिक तनाव के रूप में भी दिखने लगा है. इसी कड़ी में बडिय़ाखेड़ी में जलप्रदाय ड्यूटी पर तैनात नगर पालिका कर्मचारी के साथ मारपीट की घटना सामने आई है.

जानकारी के अनुसार, नगर पालिका कर्मचारी पूनमचंद ट्यूबवेल के माध्यम से क्षेत्र में पानी की सप्लाई कर रहे थे. इसी दौरान स्थानीय निवासी निखिल वहां पहुंचा और अपनी गली में पहले पानी चालू करने की मांग करने लगा. इस बात को लेकर दोनों के बीच बहस शुरू हो गई, जो देखते ही देखते विवाद में बदल गई. आरोप है कि निखिल ने कर्मचारी के साथ गाली-गलौज की और मारपीट कर दी. पीडि़त पूनमचंद ने कोतवाली थाने में दिए आवेदन में बताया कि आरोपी ने जान से मारने की धमकी भी दी और दबाव बनाया कि पहले उसकी लाइन चालू की जाए, अन्यथा परिणाम भुगतने होंगे.

घटना की जानकारी मिलते ही नगर पालिका के अन्य कर्मचारियों में रोष फैल गया. बड़ी संख्या में नपाकर्मी कोतवाली थाने पहुंचे और आरोपी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई. नगर पालिका प्रशासन ने शासकीय कार्य में बाधा डालने और कर्मचारी के साथ मारपीट करने के मामले में आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है. पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित धाराओं में केस दर्ज कर लिया है.

दरअसल, शहर में इस समय जल संकट लगातार गहराता जा रहा है।.अभी गर्मी अपने चरम पर भी नहीं पहुंची है, लेकिन पानी की कमी ने लोगों को परेशान करना शुरू कर दिया है. नगर पालिका द्वारा पानी बचाने के उद्देश्य से कई दिन पूर्व से सप्लाई का शेड्यूल बदलकर दो दिन छोड़कर कर दिया है, जिससे कई वार्डों में स्थिति और खराब हो गई है. दशहरावाला बाग, भगवती कॉलोनी और इंदौर नाका जैसे क्षेत्रों में पाइपलाइन से पानी घरों तक नहीं पहुंच पा रहा है. यहां के लोग हैंडपंप और निजी ट्यूबवेल पर निर्भर हैं, लेकिन गिरते भू-जल स्तर के कारण ये जलस्त्रोत भी धीरे-धीरे सूखने लगे हैं. शहर के करीब 2000 जलस्त्रोतों को रिचार्ज करने वाली सीवन नदी भी कई स्थानों पर सूख चुकी है, जिससे संकट और गहरा गया है.

तालाबों और डैम की स्थिति भी चिंता बढ़ाने वाली है.जमोनिया और भगवानपुरा तालाब सहित काहिरी डैम का जलस्तर लगातार घट रहा है. कम बारिश के कारण इस बार पर्याप्त जल संग्रह नहीं हो पाया, जिसका असर अब साफ दिखाई दे रहा है. यदि समय रहते जल संरक्षण पर ध्यान नहीं दिया गया और नागरिकों ने पानी के उपयोग में संयम नहीं बरता, तो आगामी अप्रैल और मई में हालात और गंभीर हो सकते हैं.

जलस्त्रोतों में काफी कम बचा पानी

शहर की प्यास बुझाने का दारोमदार निभाने वाले भगवानपुरा और जमोनिया तालाब के अलावा पार्वती नदी के काहिरी बंधान में काफी कम पानी बचा है. नपा से प्राप्त जानकारी के अनुसार 17 मार्च को जमोनिया तालाब में 17.4 फीट तथा भगवानपुरा में 12.6 फीट पानी ही बचा है. जबकि काहिरी बंधान में 460.87 एफटीएल पानी रह गया है. आगामी दिनों में जलसंकट के भीषण होने की आशंका बलवती हो गई है.

 

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