ग्वालियर: ग्वालियर रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास में पहली बार ग्वालियर स्टोन का उपयोग किया जाएगा। अभी तक रेलवे स्टेशनों पर ज्यादातर कोटा स्टोन और ग्रेनाइट लगाए जाते हैं, इस बार ग्वालियर स्टेशन के नए हिस्सों में स्थानीय पत्थर ग्वालियर सैंड स्टोन की चमक दिखाई देगी। उत्तर मध्य रेलवे के अंतर्गत आने वाले ग्वालियर रेलवे स्टेशन का 535 करोड़ रुपये की लागत से पुनर्विकास किया जा रहा है।
स्टेशन की दीवारों, फर्श और अन्य प्रमुख हिस्सों में इस पत्थर का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे स्टेशन की हेरिटेज लुक देने की कोशिश भी की जाएगी, जैसा कि स्टेशन की पुरानी इमारत में ग्वालियर स्टोन से पहले से ही दिखाई देता है।ग्वालियर स्टोन की विदेशों में भारी मांग है, यहां से हर साल 500 करोड़ रुपये का पत्थर निर्यात किया जाता है। स्टेशन निर्माण में इसके उपयोग से अंचल के पत्थर कारोबारियों को नई पहचान और बड़ा काम मिलेगा।
ग्वालियर-चंबल अंचल में इस पत्थर की करीब 60 वैध खदानें हैं और 50 से अधिक व्यापारी इस क्षेत्र से जुड़े हैं।ग्वालियर स्टोन, ग्लोबल डिमांड और लोकल पहचान रखता है। 500 करोड़ रुपये का पत्थर हर साल विदेशों में भेजा जाता है। 60 वैध खदानें संचालित हैं। 50 से अधिक कारोबारी इस पत्थर व्यापार से जुड़े हैं। सैंड-स्टोन होने के कारण यह एक अनूठा हेरिटेज लुक प्रदान करता है। ग्वालियर जंक्शन पर वर्तमान में 4 प्लेटफॉर्म हैं, जिन्हें बढ़ाकर 6 किया जा रहा है। यात्रियों की सुविधा के लिए 19 लिफ्ट और 23 एस्केलेटर लगेंगे।
