भिंड: भिंड में नेशनल हाईवे के निर्माण को लेकर कल 16 मार्च को बड़ा आंदोलन होगा। आंदोलन से पहले प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत की कोशिश भी हुई. प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री राकेश शुक्ला ने कलेक्टर, स्थानीय विधायक, दंदरौआ धाम के महंत और आंदोलनकारियों के साथ बैठक की. हालांकि बातचीत के बाद भी कोई सहमति नहीं बन सकी. अधिकारियों ने फरवरी 2027 तक हाईवे चौड़ीकरण का काम शुरू होने की बात कही, लेकिन आंदोलनकारी इससे संतुष्ट नहीं हुए. इसी कारण अब आंदोलन की तैयारी और तेज हो गई है.
भिंड और आसपास के क्षेत्रों में सड़क की स्थिति लंबे समय से राजनीतिक चर्चा का विषय रही है. स्थानीय लोग आरोप लगाते हैं कि हाईवे से टोल वसूली तो जारी है, लेकिन सड़क के विस्तार और सुधार का काम अपेक्षित गति से नहीं हुआ. इसी असंतोष ने अब आंदोलन का रूप ले लिया है.
इस आंदोलन की खास बात यह है कि इसका नेतृत्व संत समाज कर रहा है. संत समिति के जिला अध्यक्ष कालिदास महाराज ने साफ कहा है कि इस बार आंदोलन आर-पार का होगा. संत समाज के शामिल होने से आंदोलन को सामाजिक और नैतिक समर्थन मिला है, जिससे प्रशासन के लिए इसे नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा.आंदोलनकारियों ने स्पष्ट संदेश दिया है कि यदि सड़क चौड़ीकरण का काम जल्द शुरू नहीं हुआ तो टोल वसूली का विरोध किया जाएगा. बरेठा टोल प्लाजा को आंदोलन का केंद्र बनाया गया है. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक सड़क की स्थिति सुधरती नहीं, तब तक टोल वसूली उचित नहीं है.
वार्ता नाकाम होने के बाद प्रशासन की चुनौती बढ़ी
आंदोलन को लेकर प्रशासन के सामने कानून व्यवस्था की चुनौती खड़ी हो गई है. बताया जा रहा है कि प्रदर्शन के लिए औपचारिक अनुमति नहीं मिली है, लेकिन अंचल भर से आंदोलनकारी फिर भी बड़ी संख्या में जुटने लगे हैं. ऐसे में प्रशासन को स्थिति संभालने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था करनी पड़ रही है.
