बेंगलूरू, मुंबई, दिल्ली-एनसीआर में कार्यस्थल साज-सज्जा की लागत एशिया प्रशांत क्षेत्र में सबसे आकर्षक : नाइट फ्रैंक

मुंबई, 14 मार्च (वार्ता) अचल संम्पत्ति बाजार की वैश्विक परामर्श सेवा फर्म नाइट फ्रैंक की एक रिपोर्ट के अनुसार बेंगलूरू, मुंबई और दिल्ली-एनसीआर औसत स्तर की कार्यस्थल साज-सज्जा की लागत के मामले में एशिया प्रशांत क्षेत्र में सबसे कम लागत वाले शहर है।

नाइट फ्रैंक की फिट-आउट (खाली कक्ष को कार्यस्थल के रूप में सज्जित करने) की लागत पर जारी की जाने वाली शनिवार को जारी ताजा रिपोर्ट -एशिया-पैसिफिक फिट-आउट कॉस्ट गाइड- 2026 के अनुसार, भारत एशिया-प्रशांत क्षेत्र के सबसे किफायती ऑफिस फिट-आउट बाजारों में से एक बना हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार बेंगलूरू, मुंबई और दिल्ली-एनसीआर में औसत स्तर के ऑफिस इंटीरियर की औसत लागत 449 अमेरिकी डॉलर प्रति वर्ग मीटर है। इन शहरों में कामचलाऊ फर्निशिंग की लागत 264 डॉलर प्रति वर्ग मीटर तथा उच्च और प्रीमियम फिटिंग की लागत 838 वर्ग मीटर है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की प्रतिस्पर्धी श्रम लागत, ठेकेदारी की स्थापित व्यवस्थाएं और घरेलू सोर्सिंग क्षमता कार्यस्थल निर्माण की लागत को क्षेत्र के कई अन्य बाजारों की तुलना में काफी कम बनाए रखती है। नाइट फ्रैंक के अनुसार इस तरह की मजबूती से भारत तकनीकी संचालन और ग्लोबल कैपिसिटी सेंटर (जीसीसी) के विस्तार में लगी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए और आकर्षक बन जाता है।

इस रिपोर्ट के अनुसार ऑस्ट्रेलासिया, पूर्वी एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया और भारत के 23 शहरों में ऑफिस को अंदर से तैयार करने की औसत लागत ( फिट-आउट लागत) सिंगापुर में 2,029 अमेरिकी डॉलर पर सबसे ऊंची है।

टोक्यो में यह लागत 1,994 डॉलर, ताइपे 1 593, सोल 1,454 , आकलैंड 1,438, सिडनी1,334, आस्ट्रेलिया1 ,300, हांगकांग 1,292 ,ब्रिसबन और पर्थ 934, Perth 934, बीजिंग, गुआंगझोऊ, शेनझेन और शांघाई 929, जकार्ता 899, कुआलालंपुर 849, मनीला 849, बैंकाक 797 हो ची मिन्ह सिटी 500 और नॉमपेन्ह 375 अमेरिकी डॉलर।

नाइट फ्रैंक इंडिया के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर शिशिर बैजल ने कहा, “ भारत के ऑफिस बाजार एशिया-प्रशांत में अपनी किफायती लागत के कारण अलग पहचान रखते हैं। बेंगलूरू, मुंबई और दिल्ली-एनसीआर में लगभग 449 डॉलर प्रति वर्ग मीटर की औसत लागत के साथ कंपनियां उच्च गुणवत्ता वाले कार्यस्थल तैयार कर सकती हैं और लागत नियंत्रण भी बनाये रख सकती हैं। ”

उन्होंने कहा कि भारत के इस शहरों में प्रतिस्पर्धी श्रम, मजबूत ठेकेदार नेटवर्क और घरेलू सप्लाई चेन देश को तकनीकी संचालन और जीसीसीका विस्तार करने वाली बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए और आकर्षक बनाते हैं।

 

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