इंदौर:शहर में एमओएस को लेकर नगर निगम राज्य सरकार के संशोधन पर वसूली कर रहा है. सवाल उठता है कि नगर निगम एमआईसी में स्वीकृति के बिना एमओएस की राशि, को भी सरचार्ज सहित कैसे वसूल सकता है? नगर निगम ने इसके लिए करदाताओं को सूचित नहीं किया और सीधे खाताधारकों के खाते राशि बढ़ाकर बिल भेज दिए गए. एमओएस की राशि जमा करने और वसूलने के लिए निगम ने जाहिर सूचना भी प्रकाशित नहीं कारवाई, क्यों? पहले भी नई वसूली या कर के लिए करदाताओं को सूचित करने के लिए जाहिर सूचना प्रकाशन के साथ विभिन्न तरह से प्रचार प्रसार करके सूचित किया जाता रहा है.
नगर निगम ने 2020 से सभी संपत्तिकर धारकों के खातों में एमओएस की राशि जोड़कर कमर तोड़ बिल जारी कर दिए है. नगर निगम ने एमओएस में पांच साल की बकाया राशि सरचार्ज भी जोड़ दिया है. इससे नगर निगम की जनता पर अनावश्यक वसूली की जा रही है. बताया जा रहा है कि राज्य सरकार ने नगर निगम को आत्म निर्भर बनने के लिए प्लॉट साइज के अनुसार संपत्तिकर राशि वसूलने का प्रावधान 2020 में किया था. पहले नगर निगम द्वारा प्लॉट साइज में खुली जगह छोड़ने पर संपत्तिकर निर्माण पर लेने का नियम था. अब नगर निगम ने इस साल से राज्य सरकार के निर्णय पर एमओएस पर राशि वसूली शुरू की है, तो वर्ष 2026-2027 से ही एमओएस राशि वसूली जाना चाहिए, मगर नगर निगम जनता पर अनावश्यक आर्थिक भार डाल कर बेवजह वसूली कर रहा है. वह तब जब एमआईसी ने राज्य सरकार के संशोधन पर अभी स्वीकृति हो नहीं दी है. यदि राज्य सरकार के सीधे आदेश लागू होते है तो फिर नगर सरकार का मतलब क्या है?
सेल्फ असेसमेंट की भी जाहिर सूचना प्रकाशित की थी नगर निगम ने संपत्तिकर की राशि में बढ़ाने और खातों की संख्या बढ़ाने के लिए सेल्फ असेसमेंट योजना शुरू की थी, जिसमें मकान मालिक को स्वयं के मकान की गणना कर राशि बढ़ाकर देने का प्रावधान और अधिकार दिया गया था. इसके बाद नगर निगम द्वारा फिर समय सीमा बीतने के बाद जनता के मकानों का सर्वे शुरू किया था. एमओएस की राशि जनता से वसूलने के लिए नगर निगम ने कोई नियमानुसार कार्रवाई नहीं की है और सीधे खाताधारकों पर बढ़ी हुई राशि का अनावश्यक आर्थिक भार थोंप दिया गया है.
