
जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट ने एक आपराधिक प्रकरण की सुनवाई के दौरान सरकारी वकील के बिना तैयारी के हाजिर होने पर कड़ी नाराजगी जताई। दरअसल, सरकारी वकील कमल सिंह बघेल ने सुनवाई से पहले केस की तैयारी नहीं की थी। उन्होंने कोर्ट के किसी भी सवाल का जवाब नहीं दिया। जस्टिस विवेक अग्रवाल एवं जस्टिस रत्नेश चंद्र सिंह बिसेन की युगलपीठ ने कहा कि राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके वकील कोर्ट की मदद करने के लिए अच्छी तरह से तैयार हों। न्यायालय ने चीफ सेक्रेटरी को कहा कि वे इस मामले में कार्रवाई करें। इसके साथ ही न्यायालय ने कहा कि सरकारी अधिवक्ताओं की सूची का पुनरीक्षण करें और वकीलों की काबिलियत की जांच करें, ताकि वे अन्य बातों की बजाय कोर्ट की मदद कर सकें।
सिंगरौली निवासी बच्चे बसोर, शोभना बसोर सहित अन्य को बैढऩ की कोर्ट ने हत्या के मामले में आजीवन कारावास सहित अन्य सजाएं सुनाई थीं। उन्होंने सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील पेश की थी। अपीलार्थियों ने जमानत के लिए आवेदन भी पेश किया था। शोभना की ओर से दलील दी गई कि उसका नाम एफआईआर में नहीं है, फिर भी उन्हें आरोपी बनाया गया। कोर्ट ने शोभना को जमानत दे दी। वहीं बच्चेलाल के पास से खून से लथपथ लाठी मिली थी। कोर्ट ने उसे जमानत देने से इंकार कर दिया।
