नयी दिल्ली 12 मार्च (वार्ता) विदेश मंत्रालय ने कहा है कि पश्चिम एशिया संकट के बीच बंगलादेश ने भारत से डीजल की आपूर्ति के लिए अनुरोध किया है और इस पर देश में डीजल की जरूरत और उपलब्धता के आधार पर विचार किया जा रहा है। बंगलादेश के अलावा श्रीलंका और मालदीव से भी भारत को इसी तरह के अनुरोध मिले हैं जिनपर विचार किया जा रहा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने गुरुवार को यहां साप्ताहिक ब्रीफिंग में सवालों के जवाब में यह बात कही। उन्होंने कहा कि भा विशेष रूप से पड़ोसी देशों को परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पादों का एक प्रमुख निर्यातक है। भारत और बंगलादेश के बीच ऊर्जा क्षेत्र में लंबे समय से चले आ रहे सहयोग का उल्लेख करते हुए प्रवक्ता ने कहा कि भारत 2007 से नुमालीगढ़ रिफाइनरी से बांग्लादेश को डीज़ल की आपूर्ति कर रहा है। यह आपूर्ति जलमार्ग और रेल सहित विभिन्न माध्यमों से की जाती रही है और बाद में भारत-बांग्लादेश मैत्री पाइपलाइन के माध्यम से भी की जाने लगी।
प्रवक्ता ने कहा कि अक्टूबर 2017 में नुमालीगढ़ रिफाइनरी और बांग्लादेश पेट्रोलियम कॉरपोरेशन के बीच आपसी सहमति की शर्तों पर हाई स्पीड डीज़ल की आपूर्ति के लिए एक बिक्री-खरीद समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे।
उन्होंने कहा, ” 2007 से बांग्लादेश को डीज़ल का निर्यात जारी रहा है, लेकिन किसी भी निर्णय लेते समय भारत की रिफाइनिंग क्षमता, हमारी घरेलू आवश्यकताओं और डीज़ल की उपलब्धता को ध्यान में रखा जाएगा।” nप्रवक्ता ने कहा कि भारत को श्रीलंका और मालदीव से भी इसी तरह के अनुरोध मिले हैं जिनपर विचार किया जा रहा है। nइस बीच सरकार ने बुधवार को कहा कि देश की कच्चे तेल की आपूर्ति सुरक्षित बनी हुई है, क्योंकि अब देश का लगभग 70 प्रतिशत ईंधन आयात होर्मुज़ जलडमरूमध्य से हटकर वैकल्पिक मार्गों से किया जा रहा है।

