तेहरान | ईरान ने उन मीडिया रिपोर्ट्स को पूरी तरह से खारिज कर दिया है जिनमें दावा किया गया था कि उसने भारतीय ध्वज वाले तेल टैंकरों को होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने की विशेष अनुमति दे दी है। तेहरान के आधिकारिक सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि भारत को इस रणनीतिक मार्ग पर कोई विशेष राहत नहीं दी गई है। इससे पहले ऐसी खबरें आई थीं कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर और उनके ईरानी समकक्ष के बीच हुई उच्च स्तरीय वार्ता के बाद भारतीय जहाजों के लिए रास्ता खोल दिया गया है, जिसे अब ईरान ने “असत्य” करार दिया है।
हालिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि ‘पुष्पक’ और ‘परिमल’ नामक दो भारतीय टैंकर सुरक्षित रूप से इस मार्ग को पार कर गए हैं। इसके साथ ही, सऊदी अरब से कच्चा तेल लेकर एक लाइबेरियाई टैंकर के मुंबई पहुंचने को भी भारत के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा था। हालांकि, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दोहराया है कि इस जलमार्ग से गुजरने वाले हर जहाज को पहले अनुमति लेनी होगी। ईरान ने चेतावनी दी है कि बिना अनुमति के मार्ग का उपयोग करने वाले जहाजों को सैन्य हमलों का निशाना बनाया जा सकता है।
अमेरिका और इजरायल के खिलाफ ईरान का सैन्य संघर्ष अब 13वें दिन में प्रवेश कर चुका है, जिससे फारस की खाड़ी में समुद्री यातायात लगभग ठप है। तेहरान का रुख कड़ा है कि वे केवल उन्हीं जहाजों को अनुमति देंगे जो अमेरिका या इजरायली हितों से नहीं जुड़े हैं। इस अनिश्चितता के कारण वैश्विक तेल कीमतों में भारी उछाल आया है। होर्मुज जलडमरूमध्य पर कड़े प्रतिबंधों और निरंतर निगरानी के कारण भारत सहित दुनिया भर की ऊर्जा सुरक्षा पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं, क्योंकि इस मार्ग का कोई अन्य प्रभावी विकल्प मौजूद नहीं है।

